नक्खी घाट में पावरलूम में घुसा बाढ़ का पानी।
वरुणा के तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी भरने से बुनकरों के रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। करघों में पानी घुसने से कामकाज पूरी तरह ठप है। इससे चौकाघाट से सरैंया, नक्खीघाट तक लगभग दो सौ बुनकर परिवार प्रभावित हैं। रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। शुक्रवार-शनिवार की रात पानी की रफ्तार धीमी होने पर लगा कि अब बाढ़ से राहत मिल जाएगी लेकिन शनिवार की सुबह से गंगा-वरुणा में फिर बढ़ाव शुरू होने से बुनकर परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं।
कैंटोमेंट से सरायमोहाना के बीच वरुणा के तटीय इलाकों में बाढ़ से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। नक्खीघाट से सरैया तक सैकड़ों बुनकर परिवार रहते हैं। बाढ़ का पानी घरों और करघों में घुस गया है। इससे बुनकर परिवारों की दोहरी मार झेलनी पड़ी है। बुनकरों का कहना है कि अब करघों पर कई दिनों तक काम नहीं हो पाएगा। बाढ़ हटने के बाद उन्हें नए सिरे से दुरुस्त करना होगा।
हाजी ओकास अंसारी ने बताया कि अकेले सरैया इलाके में 100 से ज्यादा बुनकरों के कारखाने बाढ़ में डूब गए हैं। प्रभावित बुनकर परिवार या तो शिविर में या फिर रिश्तेदारों के यहां गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ राहत शिविरों में रोजाना शरणार्थियों की तादाद बढ़ रही है। ढेलवरिया, बड़ा मंदिर, मीराघाट और सरैया स्थित शिविर में सैकड़ों बुनकर परिवार शरण लिए हुए हैं।