सीबीआई की टीमों ने बीएचयू आकर खरीद और उससे जुड़ी दूसरी शिकायतों की जांच की। दस्तावेज देखे और जिम्मेदारों के बयान भी दर्ज किए। सीबीआई ने जांच रिपोर्ट लोकपाल को दी। इसके बाद लोकपाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट की समीक्षा की और 21 मई को फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि जो भी सामान खरीदे गए हैं वो नियमावली के अनुरूप हैं। दूसरे चिकित्सा संस्थानों से कम दाम पर खरीदे गए हैं।
खरीदारी में पारदर्शिता बरती गई है इसलिए अपील खारिज करते हुए शिकायत का निस्तारण कर दिया। लोकायुक्त की पीठ में शामिल सदस्यों में न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर (अध्यक्ष, लोकपाल), न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी (न्यायिक सदस्य), न्यायमूर्ति संजय यादव (न्यायिक सदस्य), सुशील चंद्रा (सदस्य), पंकज कुमार (सदस्य), अजय तिर्की (सदस्य) शामिल रहे।
ट्रॉमा सेंटर में खरीदारी की शिकायतों पर लोकपाल की पीठ ने जो फैसला दिया है, उसमें सीबीआई की जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। जेम पोर्टल से नियमानुसार खरीदारी की गई है। फैसले से सिद्ध हो गया कि अनावश्यक विवादों से उत्कृष्ट संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाया जा रहा है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का बेहतर जांच, उपचार किया जा रहा है। -प्रो. सौरभ सिंह, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर बीएचयू