उन्होंने कहा कि इस संख्या को समझने के लिए एसआईआर में इस्तेमाल हो रही एएसडीडी श्रेणियों को देखना होगा। ए का अर्थ एब्सेंट यानी सत्यापन के दौरान लगातार अनुपस्थित मतदाता हैं। तीन करोड़ लोग ऐसे पाए गए हैं। बीएलओ तीन बार घर पहुंचा और व्यक्ति नहीं मिला तो उसे अनुपस्थित श्रेणी में रखा गया। एस का अर्थ शिफ्टेड यानी स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं।
शुरुआत में ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 करोड़ थी। इनमें से करीब छह करोड़ लोगों ने नए पते पर फॉर्म-6 भर दिया और अब छह करोड़ नाम शिफ्टेड श्रेणी में हैं। डी का अर्थ डीसिज्ड यानी मृतक मतदाता और दूसरा डी डुप्लीकेट प्रविष्टि है। पात्रा ने कहा कि सत्यापन में करीब 2.80 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम मिले। करीब एक करोड़ मतदाता ऐसे मिले, जिनके नाम दो स्थानों की मतदाता सूची में थे। इस तरह करीब 13 करोड़ की संख्या सामने आई है। पात्रा ने कहा कि इसे वोट चोरी कहना गलत है।
उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बनाए रखना या एक व्यक्ति के दो स्थानों पर वोट रहने देना मतदाता सूची की शुद्धता के खिलाफ है। पात्रा ने कहा कि देश में घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर रहने नहीं दिया जाएगा। विपक्षी नेताओं के बांग्लादेश से सीख लेकर सत्ता परिवर्तन और सड़क पर अराजकता जैसे कथित बयानों पर कहा कि ऐसी भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती। क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिला अध्यक्ष राम सकल पटेल, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नवरतन राठी, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी मधुकर चित्रांश, मीडिया संयोजक महानगर प्रमील पांडेय, संतोष सोलापुरकर मौजूद रहे।
सबसे ज्यादा नाम कटे तो बंगाल में टीएमसी कैसे जीती
पात्रा ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए विपक्ष के राजनीतिक पक्षपात के आरोप पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक नाम हटाए गए, उनमें अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत हुई और भाजपा केवल पांच सीटों पर जीती। उन्होंने शमशेरगंज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 74,775 नाम हटे, लेकिन जीत टीएमसी की हुई। लालगोला में भी बड़ी संख्या में नाम हटे और वहां भी टीएमसी जीती। पात्रा ने कहा कि अगर नाम काटकर भाजपा को चुनाव जिताने की साजिश होती तो इन सीटों पर परिणाम अलग होना चाहिए था।
प्रियंका के वोट पर कांग्रेस पर तंज
संबित पात्रा ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर तंज कसा। प्रियंका गांधी वाड्रा पर कहा कि कांग्रेसियों को पहले यह देखना चाहिए कि कहीं गांधी परिवार के इलेक्टोरल रोल से प्रियंका गांधी का नाम ही तो नहीं कट गया। उन्होंने व्यंग्य किया कि प्रियंका से भी फॉर्म-6 भरवा लें।