शहर उत्तरी विधानसभा में 4.95 प्रतिशत प्रति घंटे वोटिंग हुई। सुबह सात बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे तक चला। कुल 54.55 प्रतिशत वोट पड़े। पिछले दो चुनावों पर नजर डालेें तो दोनों बार से कम मतदान इस बार हुआ है। 2014 में यहां 55.33 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। 2019 में 54.71 प्रतिशत वोट पड़े।
इस बार शाम 6 बजे तक 54.55 प्रतिशत हुई। यह वैश्य बहुल इलाका है। इसका प्रतिनिधित्व राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल करते हैं। मुस्लिम इलाकों में लाइन लगाकर वोट दिया गया। शहर उत्तरी विधानसभा में सुबह सात बजे से शुरू हुआ मतदान दिन चढ़ने के साथ बढ़ता गया।
सुबह दस बजे के बाद बूथों पर मतदाताओं की लाइन लग गई। मौसम ने भी मतदाताओं का साथ दिया। कई बूथों पर वोट डालने के लिए दोपहर में भी लाइन लगी रही। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में पर्ची मिलान के बाद लोगों को बूथों में भेजा गया। जेपी मेहता इंटर कॉलेज को गुब्बारों से सजाया गया था।
सुधाकर महिला इंटर कॉलेज बूथ के आमने सामने दो बूथ थे। इनमें एक बूथ मॉडल था। नई बस्ती में वोट डालने वालों को पर्ची देने के दौरान पानी पिलाया जा रहा था। तुलसी निकेतन बालिका इंटर कॉलेज खजुरी में भी मतदान के बाद लोगों को शिकंजी दी जा रही थी।
दक्षिणी विधानसभा में मतदान का प्रतिशत पिछले दो लोकसभा चुनाव के मुकाबले कम रहा। प्रतिघंटे मतदान प्रतिशत की बात करें तो दक्षिणी विधानसभा में हर घंटे 4.8 फीसदी की रफ्तार से मतदान हुआ। सुबह 11 बजे से एक बजे के बीच मतदान का प्रतिशत सबसे अधिक था और सबसे कम शाम को पांच से छह के बीच रहा।
आसमान में छाए बादलों ने मतदाताओं को राहत तो दी लेकिन मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ सका। दक्षिणी विधानसभा की बात करें तो 2014 में मतदान का प्रतिशत 60.78 और 2019 में 58.16 फीसदी था। 2014 के मुकाबले दक्षिणी विधानसभा में 3.08 और 2019 के मुकाबले .46 फीसदी कम मतदान हुआ है।
दक्षिणी विधानसभा का क्षेत्र दशाश्वमेध घाट से लेकर राजघाट तक है। मिश्रित आबादी होने के बावजूद यह ब्राह्मण बाहुल्य विधानसभा है। हिंदू और मुस्लिम आबादी की बात करें तो यह दोनों लगभग बराबर हैं।
दशाश्वमेध से लेकर कालभैरव वार्ड के बीच पक्का महाल में मतदान के लिए निकले मतदाताओं की राय भी अलग-अलग रही। कोई विकास के मुद्दे पर मतदान कर रहा था तो कोई महंगाई पर। मतदान केंद्रों के बाहर बने भाजपा और कांग्रेस की चौकियों पर भीड़ बराबर रही।
Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
कैंट विधानसभा ने वाराणसी लोकसभा का मत प्रतिशत बढ़ाने में साथ नहीं दिया। वाराणसी लोकसभा की पांच विधानसभा सीटों में सबसे कम मतदान कैंट विधानसभा में ही हुआ। यहां सिर्फ 51.47 फीसदी वोट पड़े जबकि 2014 में यहां 55.81 और 2019 में 52.42 प्रतिशत मतदान हुआ था। उस लिहाज से देखा जाए तो दस साल में कैंट विधानसभा में करीब चार फीसदी मतदान घट गया।
कायस्थ बाहुल्य कैंट विधानसभा सीट पर करीब तीन दशक से भाजपा का कब्जा है। इसके अलावा बंगाली समुदाय, दक्षिण भारतीय और मुस्लिम मतदाता भी अच्छी स्थिति में हैं। विधानसभा में गंगा घाट का करीब आधा क्षेत्र और बीएचयू और शहर के प्रमुख क्षेत्र आते हैं। सरकार की ओर से कराए गए विकास कार्य भी इसी विधानसभा का हिस्सा है। भदैनी या एक दो और क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी बसपा का बस्ता तक नहीं दिखा।
टक्कर ही सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच दिख रही थी। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि शाम तीन बजे से छह बजे तक के समय के बीच यदि मतदान प्रतिशत की रफ्तार सुबह वाली ही बनी रहती तो यह प्रतिशत करीब 60 फीसदी तक पहुंच सकता था और ऐसा होता तो काशी का कुल मतदान प्रतिशत भी 60 फीसदी के पार चला जाता।
पटेल बहुल सेवापुरी विधानसभा में मतदाताओं का उत्साह देखते बना। घरों से टोलियों में निकले मतदाताओं ने खूब वोट बरसाए। अलसुबह मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतार जो लगी तो पूरे दिन उनका जोश बरकरार रहा। मौसम ने भी साथ दिया। दिन में तीखी धूप रही लेकिन मतदाताओं का जोश कम नहीं हुआ। शाम ढलने तक मतदाताओं की कतार बूथों पर लगी रही।
क्या बुजुर्ग, क्या दिव्यांग और महिलाएं सभी ने अपना फर्ज निभाकर अपनी विधानसभा को फर्स्ट डिविटन पास कराया। चार विधानसभा की अपेक्षा सेवापुरी में 60.93 प्रतिशत मतदान हुआ। फर्स्ट डिवीजन पास भी हुआ, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में मतदान की बराबरी नहीं सके। पिछली बार की तुलना में 2.46 फीसदी मतदान का ग्राफ घटा है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सेवापुरी विधानसभा में 63.39 प्रतिशत मतदान और वर्ष 2014 में 60.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। बसंतपुर के दिव्यांग लल्लन राम लाठी के सहारे मतदान केंद्र तक पहुंचे और उन युवाओं को आईना दिखाया, जो तापमान और अन्य कारणों का हवाला देकर मतदान केंद्र तक नहीं गए। लाठी के सहारे 104 वर्षीय चुन्नीलाल यादव ने भी लोकतंत्र में अपने मत की आहुति दी।