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तेजबहादुर ने चुनाव आयोग को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने दाखिल की याचिका 

Mon, 06 May 2019 12:47 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला/वाराणसी
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तेज बहादुर यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन पत्र 1 मई को खारिज हो गया था। जिसके बाद तेजबहादुर ने  चुनाव आयोग द्वारा नामांकन रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है।

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तेज बहादुर ने कहा था कि मेरा नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया है। वो अपने साथ हुई इस ज्यादती के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि नामांकन रद्द करने के लिए सरकार के तरफ से डीएम पर दबाव बनाया गया है। ये बिल्कुल तानाशाही रवैया है। तेज बहादुर की याचिका अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दाखिल की है।

इस संबंध में तेजबहादुर का कहना है कि मैंने 1 मई को निर्धारित समय में अपना स्पष्टीकरण जमा कर दिया था बावजूद उसके मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया। इसके लिए मैंने पार्टी के फोरम से सुप्रीम कोर्ट जाने की बात की थी। इसी क्रम में पार्टी ने मेरी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है कि न्याय जरूर मिलेगा।
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वहीं, सपा के प्रदेश प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी ने बताया कि तेजबहादुर के नामांकन पत्र से सभी दस्तावेज हमने पार्टी फोरम को दे दिया है। पार्टी का जो भी फैसला होगा इसके अनुसार ही आगे की रणनीति तय होगी।

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ये था मामला

30 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच में बीएसएफ से बर्खास्त किए जाने के संबंध में दो नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी सामने आने के बाद उन्हें नोटिस दिया गया था। जांच के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह द्वारा तेजबहादुर यादव को बीएसएफ से बर्खास्तगी के संबंध में दो नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी देने पर नोटिस देकर 24 घंटे में बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर प्रस्तुत करने को कहा गया था।

तेजबहादुर को कहा गया था कि यादव बीएसएफ से प्रमाणपत्र लेकर आएं, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया। जांच में पाया गया कि यादव ने पहले नामांकन में ‘भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार या अभक्ति के कारण पदच्युत किया गया’ के सवाल पर हां में जवाब दिया और विवरण में 19 अप्रैल, 2017 लिखा है।

दूसरे नामांकन में शपथ पत्र प्रस्तुत कर पहले नामांकन में गलती से हां लिख दिया गया था। शपथ पत्र में बताया कि तेज बहादुर यादव सिंह पुत्र शेर सिंह को 19 अप्रैल, 2017 को बर्खास्त किया गया, मगर भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा पद धारण के दौरान भ्रष्टाचार एवं अभक्ति के कारण पदच्युत नहीं किया गया है।

जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए दो नोटिसों का जवाब देने 1 मई को सुबह 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ आरओ से मिलने पहुंचे। इसके बाद उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था।
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