मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, मऊ, बलिया तक कोरोना वायरस को लेकर भय के बीच भ्रांतियां भी हैं और सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आह्वान के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूरत, मुंबई और ऐसे अन्य बड़े शहरों से लौटने वालों को लेकर पूरे प्रदेश के अधिकारियों को आगाह किया था। मगर, लॉकडाउन से पहले और कुछ समय बाद तक बड़ी संख्या में लोग गांवों में पहुंचे।
मुख्यमंत्री की चिंता पर भी नहीं जागे अफसर
मुख्यमंत्री कार्यालय ने 22 मार्च को लिखित निर्देश जारी किया था कि जौनपुर, मिर्जापुर, मऊ, कुशीनगर, गाजीपुर, अयोध्या, बस्ती, बाराबंकी, देवरिया, बलिया, भदोही में मुंबई व सूरत आदि शहरों से बड़ी संख्या में लोग लौटे हैं। अपील की गई थी कि बाहर से आने वाले ज्यादा लोगों से नहीं मिले। मगर, इन जिलों के प्रशासन ने ना तो बाहर से आए लोगों की सूची बनाई और ना ही उन्हें चिन्हित किया। जबकि इन्हें कम से कम 14 दिन सेल्फ आइसोलेशन या क्वारंटीन किया जाना चाहिए था। मगर, अफसर मुख्यमंत्री की चिंता के बाद भी नहीं जागे।
गांव वालों ने बनाई दूरी
प्रशासन की लापरवाही से गांवों में अविश्वास की स्थिति है। कई गांवों में बाहर से आने वाले लोगों से स्थानीय लोगों ने दूरी बनाई है। मिर्जापुर के सहसेपुर गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि करीब 20 परिवारों के अलग-अलग सदस्य सूरत और मुंबई में रहते हैं। गांव में लौट तो आएं हैं मगर उनसे कोई बात करने को तैयार नहीं है। जांच-पड़ताल के बाद आए होते तो हमें क्या दिक्कत थी, मगर पता नहीं वहां से चीन वाला वायरस लेकर न लौटे हों।