डीएवी पीजी कॉलेज में दो दिवसीय महासम्मेलन में वक्ताओं ने व्यक्त किए विचार
साहित्य लोक का प्रतिपक्ष दर्शाता है, साहित्य ही एक ऐसा तत्व है जिसमें लोक की हिस्सेदारी होती है। जनतंत्र में आम नागरिक के लिए साहित्य एक बड़ा हथियार है। यह कहना है काशी विद्यापीठ के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. अनुराग कुमार का वह बृहस्पतिवार को डीएवी पीजी कॉलेज में महासम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
लिवरम फॉउंडेशन और के टू पब्लिकेशन की ओर से पर्यावरण, साहित्य एवं सिनेमा विषय पर आयोजित महासम्मेलन में मुख्य वक्ता प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बाजारीकरण के दौर में साहित्य कहीं खो सा गया है, आधुनिकता की गहरी धुंध समाज में फैल रही है। इस दौरान प्रो. ब्रह्मदेव मंडल, डॉ. इंद्रजीत मिश्रा, प्रो. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. विजय कुमार, प्रो. समीर कुमार पाठक, रूपेश गुप्ता, डॉ. श्वेता सरन उपस्थित रहे।
पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विभिन्न लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल एवं अन्य अतिथियों ने गांधी दर्शन, मनोहर श्याम जोशी के उपन्यासों में आधुनिक एवं उत्तर आधुनिक विमर्श सहित अन्य पुस्तकों का लोकार्पण किया।
फिल्मों का हुआ प्रदर्शन
इस दौरान सामाजिक सरोकार पर आधारित स्वदेश, अभिशप्त, मौन मंदिर, चलो प्रकाश की ओर, विसर्जन आदि फिल्मों का प्रदर्शन हुआ।