स्कंदपुराण में वर्णित है कि कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे। यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति। अर्थात कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन शाम को घर के बाहर यमदेव के लिए दीप रखने से अकाल मृत्यु का निवारण होता है। पूरे वर्ष में एकमात्र यही वह दिन है जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा सिर्फ दीपदान कर होती है।
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री का कहना है कि 22 अक्तूबर को धनत्रयोदशी के दिन यम को दीपदान प्रदोषकाल में करना चाहिए। प्रदोषकाल का समय 4.35 से 5.26 बजे तक है। इस समय मीन लग्न में दीपदान से मन स्थिर और क्लेश दूर होंगे। वहीं, मेष लग्न में शाम 5.26 से 7.03 बजे तक दीपदान करने से व्यय का समाधान होता है व आय में बढ़ोतरी होगी।
कैसे तैयार करें यम की दीपक ?
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ऐसे तैयार करें दीपक
ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार यम को दीपदान के लिए आटे का एक बड़ा दीपक तैयार करें। इसके उपरांत स्वच्छ रूई लेकर दो लंबी बत्तियां बना लें। उन्हें दीपक में एक दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुंह दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें। प्रदोषकाल में दीपक का रोली, अक्षत एवं पुष्प से पूजन करें। घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी सी खील अथवा गेहूं से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है। दीपक जलाकर रख लें और दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए चार मुंह के दीपक को खील आदि की ढेरी के ऊपर रख दें। इसके उपरांत यमदेवाय: नम: कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें।