वाराणसी। जैन श्वेतांबर तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण की अगुवाई में शुक्रवार की सुबह निकली अहिंसा यात्रा में धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया। जैन धर्म पताका के साथ बीएचयू परिसर में निकाली गई इस यात्रा में नशा से बचने और जीवों पर दया करने का संदेश दिया गया। महमूरगंज की बैंक कॉलोनी में हुई सभा में धर्मगुरुओं ने विश्व शांति के लिए अहिंसा को सबसे बड़ा हथियार बताया।
स्वतंत्रता भवन से सुबह सात बजे निकली इस अहिंसा यात्रा के कुलपति आवास पहुंचने पर वीसी प्रो. जीसी त्रिपाठी ने अगवानी की। इसके बाद वीसी ने जैन पताका लेकर आचार्यों के साथ कुछ दूर चले भी।
इस यात्रा में सौ से अधिक लोग शामिल थे। इसके बाद अहिंसा यात्रा सिंहद्वार होते हुए श्वेतांबर तेरापंथ सभा भवन महमूरगंज के लिए रवाना हुई। सोनारपुरा पहुंचने पर द्वारका, शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी शामिल हुए। मैत्री भवन के निदेशक फादर चंद्रकांत के अलावा अन्य धर्मों के धर्मगुरू भी अहिंसा यात्रा में शामिल हुए। बैंक कॉलोनी स्थित कल्याणी वाटिका में हुई सभा में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सद्भावना, नैतिकता और चरित्र निर्माण से ही समाज में बदलाव आएगा।
उन्होंने आलस्य से बचने और जीवों पर दया करने का संदेश दिया। इस मौके पर अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी महाराज, खान बाबा मसजिद के हाजी मोहम्मद नुरूद्दीन शाह, निजामुद्दीन ने भी नशे से दूर रहकर अहिंसा के पथ पर चलने की जरूरत बताई। गुरुद्वारा नीचीबाग के ग्रंथी धर्मवीर सिंह, सरोज सिद्दीकी, मोहम्मद अनीस, प्रो. हरिशंकर पांडेय, डॉ. पीसी शर्मा, शांति लाल जैन, शेष पाल गर्ग उपस्थित थे। संचालन दिनेश मुनि ने किया।