शक गहराने पर उन्होंने आंगन की उस जगह को खोदा जहां मिट्टी समतल की जा रही थी। खोदाई में मां आशा देवी का शव मिला। हत्या के बाद आशा को दफनाया गया था। शव जल्दी गल जाए इसलिए नमक डाला गया था। अभियोजन के मुताबिक मौके पर पहुंचे राजेंद्र प्रसाद ने अपने बेटों से कहा था कि वह पत्नी से संपत्ति अपने नाम कराने की मांग कर रहा था लेकिन उसने इन्कार दिया। इस कारण उसकी जान ले ली और भाग निकला।
पुलिस ने वारदात के तीन दिन बाद राजेंद्र प्रसाद को गिरफ्तार किया था। अदालत में 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने राजेंद्र प्रसाद को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया। दोषी का वारंट तैयार कर जिला कारागार भेजा गया।
रोज की झंझट खत्म कर दी, उसे मार दिया
अभियोजन के मुताबिक, जब शव मिल गया तो राजेंद्र ने गुस्से से कहा रोज की झंझट खत्म कर दी। आशा को मार दिया। राजेंद्र ने पत्नी की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए भारी मात्रा में नमक डालकर शव को दफना दिया ताकि शव जल्दी गल जाए। अपना गुनाह कबूल करने के बाद राजेंद्र घर से भाग निकला। इसके बाद पीड़ित बेटों ने आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी और पुलिस को बुलाया।
12 गहरे और गंभीर चोट के निशान
आशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्बरता का जिक्र किया गया था। बताया गया था कि मृतका के सिर और चेहरे पर धारदार हथियार (लकड़ी के टुकड़े और अन्य वस्तुओं) से वार किया गया था। 12 गहरे और गंभीर चोट के निशान पाए गए थे जो मौत के मुख्य कारण बने थे। पुलिस ने ठोस वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। फॉरेंसिक लैब (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) की रिपोर्ट भी सजा की आधार बनी है।
वारदात के वक्त घर में केवल दोषी राजेंद्र और उसकी पत्नी आशा देवी ही मौजूद थी। कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, यदि चारदीवारी के भीतर पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो पति को स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होता है। इसमें राजेंद्र प्रसाद पूरी तरह से विफल रहा। दो क्विंटल वजनी मिट्टी और साक्ष्यों के आधार पर राजेंद्र दोषी है। -अदालत