वाराणसी। सर्दी की मार से जीवन बेहाल हो गया है। सर्द हवाएं स्वेटर और रजाई की तहें छेद कर दिन भर कंपाती रहीं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया गलन बढ़ती गई। शाम को न घर के भीतर राहत मिल रही थी और न बाहर। ठंड लगने से जिले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि हवाई, रेल और सड़क यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पखवाड़े भर से चल रही शीतलहर से लोगों का कामकाज
प्रभावित हुआ है। फुटपाथ, घाट, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर फंसे लोगों की रातें लंबी हो गई हैं और अलाव के सहारे भी सुबह का इंतजार करते नहीं बन रहा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक काशी और आसपास के इलाकों में 14 जनवरी ठंड से राहत के आसार नहीं हैं।
पूर्वांचल में चार दिन से लगातार पारा लुढ़क रहा है। पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में 3.1 डिग्री की गिरावट आने से बच्चों, बुजुर्गों को जहां घरों में कैद होना पड़ा है। बाबतपुर मौसम केंद्र ने जहां अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री रिकार्ड किया, वहीं बीएचयू में न्यूनतम तापमान चार डिग्री दर्ज किया गया। बीएचयू की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा इकाई के कोआर्डिनेटर डॉ. आरएस सिंह ने बताया कि अभी
72 घंटे तक बर्फीली हवाओं के रुख में तब्दीली होने के संकेत नहीं है। यह स्थिति मकर संक्रांति तक रहेगी। सोमवार को सुबह सूरज नहीं निकला और दोपहर बाद गलन बढ़ने लगी और शाम को रजाई के भीतर भी कंपकंपी का एहसास होता रहा। बादलों के कारण दिन में दृश्यता बहुत कम हो गई थी। श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार रहने वाले दशाश्वमेघ पर दोपहर में सन्नाटा पसर गया। बाजार में भी रात आठ बजे के बाद चहल-पहल कम हो गई। थोड़ी-बहुत भीड़ दिखी तो अलावों के पास। गंगा स्नान करने आए तमाम श्रद्धालुओं ने गंगा जल छिड़कर और आचमन से काम चलाया।
ठंड लगने से दो की मौत
वाराणसी। ठंड लगने से जिले में दो लोगों की मौत हो गई। सेवापुरी क्षेत्र के अदामपुर निवासी राजेंद्र राजभर का पुत्र अजय (6 साल) शाम पांच बजे ठंड से कांपने लगा। परिवार के लोग उसे लेकर गोराई स्थित निजी अस्पताल जा रहे थे कि उसने दम तोड़ दिया। उधर हरहुआ बाजार में साइकल से जा रहे एक व्यक्ति की तबियत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। लोग उसे निजी क्लीनिक में ले गए, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उसकी पहचान रामधनी के रूप में की गई है, जो चौबेपुर के बीकापुर का रहने वाला है। गांव वालों ने बताया कि वह बेटी को खिचड़ी पहुंचाने बड़ागांव जा रहा था। शीतलहर बुजुर्गों की सेहत पर भारी गुजर रही है। हृदय घात के मामले बढ़े हैं। अंतिम संस्कार करने वाले भी रात में नहीं निकल रहे हैं, जिससे मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान घाटों पर भी शवों की संख्या में इजाफा हुआ है। हफ्ते भर पहले जहां मणिकर्णिका घाट पर 40-60 शव चौबीस घंटे में अंतिम संस्कार के लिए लाए जाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 75-80 तक पहुंच गया है। घाट किनारे घोसलों में पक्षियों के अलावा गलियों में पशुओं को भी कांपते हुए बेहाल हैं।