पौराणिक लक्ष्मीकुंड में मछलियों की मौत होने लगी है। दो दिन से इस कुंड में सांस लेने में दिक्कत के चलते जल जीवों के दम तोड़ने का सिलसिला शुरू है। गुरुवार को भी कुंड में सैकड़ों मछलियों ने दम तोड़ दिया। इससे दुर्गंध उठने लगी है। जानकारी मिलने के बाद भी नगर निगम ने कुंड में मर रही मछलियों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
काशी में कुंडों के संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियान के दौरान अमर उजाला ने लक्ष्मी कुंड में ऑक्सीजन की कमी को लेकर नगर निगम को आगाह किया था लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि फिर मछलियों की मौत होने लगी है। इससे पहले बीते वर्ष इस कुंड में 10 क्विंटल से भी अधिक मछलियों की मौत हुई थी।
लक्ष्मी कुंड में बुधवार से ही मछलियों की मौत का सिलसिला शुरू है। करीब दो से पांच किलो वजन की सैकड़ों मछलियां अब तक जान गंवा चुकी हैं। कहा जा रहा है कि आक्सीजन की कमी की वजह से लक्ष्मीकुंड में मछलियों की मौत हो रही है। भारी वजन के कछुए भी सांस नहीं ले पा रहे हैं। कई कछुओं को गुरुवार को तड़पते हुए देखा गया। इस कुंड में आक्सीजन की कमी से पिछले वर्ष कई कछुओं की भी जान चली गई थी। पार्षद रविकांत विश्वकर्मा ने बताया कि इस कुंड की सफाई के लिए आठ लाख रुपये की फाइल नगर निगम में लटकी हुई है। गंदगी की वजह से ऐसा हो रहा है। इस कुंड में मूर्ति विसर्जन करा दिया गया था। मूर्तियों का मलबा अभी तक नहीं निकाला जा सका है। इस वजह से भी कुंड में जबरदस्त गंदगी फैल गई है।