साल 2018 से 2026 के बीच कुल 94,816 नए मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में 86,270 मामलों का निस्तारण भी हुआ है। साल 2018, 2022 और 2025 में नए मामलों की संख्या ज्यादा दर्ज की गई। लंबित मुकदमों की गंभीर स्थिति यह है कि अदालतों में कई मुकदमे दशकों से लंबित हैं।
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आठ मामले तो ऐसे हैं, जिनमें 50 साल से दो पीढ़ियां न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। कुल 39 मामले ऐसे हैं, जिनमें अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका है। दीवानी अदालतों में 59 हजार से अधिक मामले विचाराधीन हैं। इनमें से 11 हजार मामलों में केवल स्टे आदेश जारी किए गए हैं। यह स्थिति न्याय मिलने में हो रही देरी को उजागर करती है।
11 हजार मामलों में स्टे, 41 मामले हाईकोर्ट में, 19 में रिकॉर्ड का इंतजार
लंबित 59 हजार मामलों में 11 हजार मामलों में स्टे लगा है। 41 मामले हाईकोर्ट में हैं, जबकि 19 ऐसे मामले हैं, जिनमें अदालत के समक्ष रिकॉर्ड नहीं है। इन वजहों से भी मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है। सिविल सूट के 41 हजार मामले अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों में सबसे अधिक संख्या जमीन और मकान से जुड़े विवादों की है। इसके अलावा, सात हजार विविध सिविल केस भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। देखा जाए तो सबसे ज्यादा मामले जमीन, मकान और खरीद-फरोख्त के कोर्ट में लंबित हैं।
केस-1
मुखर्जी बनाम मुश्ताक का मामला अदालत में 12 जनवरी 1970 को दाखिल हुआ। इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित है। केस में अब दूसरी पीढ़ी पैरवी कर रही है।
केस-2
डॉ. जेएम भोसले बनाम प्रियंवदा तिवारी का मामला 20 सितंबर 1971 को दाखिल हुआ, जिसमें सुनवाई चल रही है। अगली तिथि 29 जुलाई है। परिवार के लोग इस मामले को देख रहे हैं।
केस-3
हरिश्चंद्र बनाम भागवती देवी समेत अन्य का मामला 1972 में दर्ज हुआ। इस मामले में भी सुनवाई चल रही है। 26 अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित है।