कोरोना काल में विवाह टालने वालों ने नवंबर और दिसंबर में ही शादी की तिथियां तय की हैं। प्रबोधिनी एकादशी के बाद नवंबर और दिसंबर में विवाह के लिए केवल सात शुभ मुहूर्त ही प्राप्त हो रहे हैं। 25 नवंबर को प्रबोधिनी एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी और 11 दिसंबर को विवाह के लिए साल का आखिरी शुभ मुहूर्त रहेगा। 15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा। इसलिए अब अगले साल अप्रैल में ही विवाह के मुहूर्त रहेंगे।
काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन विवाह का मुहूर्त है। देश के कई हिस्सों में इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसलिए इस दिन विवाह और हर तरह के मांगलिक काम कर लिए जाते हैं। लेकिन ग्रंथों में इसे अबूझ मुहूर्त नहीं कहा गया है। इस बार नवंबर में 25 और 30 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद दिसंबर में 1, 7, 8, 9 और 11 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि इस साल 15 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में आ जाने से खरमास शुरू हो जाएगा। जो कि अगले साल 14 जनवरी तक रहेगा। खरमास में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होते हैं। इसके बाद 19 जनवरी को गुरु तारा अस्त हो जाएगा और 16 फ रवरी तक अस्त ही रहेगा। इस दौरान भी विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। फि र 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक शुक्र तारा अस्त रहेगा। इस कारण 11 दिसंबर के बाद अगले 4 महीने तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इस तरह अगले साल 22 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त रहेगा।
साल 2020 और विवाह मुहूर्त
इस साल जनवरी और फ रवरी में ही ज्यादातर विवाह हुए हैं। मार्च में होलाष्टक के कारण मुहूर्त नहीं थे। इसके बाद कोरोना के चलते मई तक बहुत ही कम शादियां हुई। अनलॉक शुरू होने के बाद 31 मई से 8 जून तक शुक्र तारा अस्त होने से मुहूर्त नहीं थे। जून में सिर्फ 7 दिन मुहूर्त थे। इसके बाद 1 जुलाई को एकादशी पर देवशयन हो गया और चातुर्मास लग गया। अधिक मास की वजह से इन 5 महीनों में कोई शुभ मुहूर्त नहीं था। अब सीधे 25 नवंबर से ही विवाह और अन्य मांगलिक काम शुरू होंगे।