लेखपाल और अफसरों का गठजोड़ करोड़ों की रकम पर कुंडली मारकर बैठा रहा और किसान पाई-पाई के लिए मोहताज रहे। पैसों के अभाव में किसी की सिंचाई नहीं हो पाई तो कोई फसलों को खाद नहीं दे पाया। ओला और अतिवृष्टि से प्रभावित जिले के करीब 33 हजार 741 किसानों को सरकार ने करीब 39.06 करोड़ रुपये जारी तो किए, लेकिन अफसरों की लापरवाही देखिए कि इसमें से केवल 1.77 करोड़ रुपये ही किसानों के खाते में पहुंच पाए। बाकी 37.29 करोड़ रुपये पड़े रह गए। 31 मार्च तक राहत की यह रकम किसानों के खातों में नहीं पहुंची तो वह वापस हो सकती है। डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने तीनों तहसीलों के एसडीएम को हिदायत दी है कि अगर बजट वापस हुआ तो वे कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
वर्ष 2015 के मार्च, अप्रैल और मई में हुई ओला वृष्टि/अतिवृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। पिछली सपा सरकार ने किसानों को कृषि निवेश अनुदान के रूप में 2016-17 में जिले की तीन तहसील सदर, राजातालाब और पिंडरा में रहने वाले किसानों के लिए 39 करोड़ 6 लाख रुपये का बजट आवंटित किया था। इसे जल्द से जल्द किसानों को बांटने के लिए प्रमुख सचिव राहत आयुक्त की ओर से दो बार पत्र भी जारी किए गए थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्षेत्रीय लेखपालों को नुकसान के आकलन की रिपोर्ट तैयार कर उसे तहसील को भेजना था। उच्चाधिकारियों की स्वीकृत के बाद संबंधित किसानों के खाते में राशि भेजी जानी थी। करीब छह महीने तक तो लेखपाल किसानों से मिलने ही नहीं गए। बाद में जानकारी के बाद जिन किसानों ने पैरवी कर लेखपालों से संपर्क किया उन्हीं के बिल तैयार कर तहसील भेजे गए और उन्हें ही प्राथमिकता के आधार पर पैसे दिए गए।
किसानों से खाता नंबर लेकर राशि सीधे उनके खाते में भेजी जानी है। पहले चेक दिए जाते थे। चेक बनवाने के नाम पर लेखपाल और दलाल मोटी रकम वसूलते थे। सीधे खाते में पैसा जाने से लेखपालों को कमीशनखोरी का ज्यादा मौका नहीं मिल रहा है। तहसील के अधिकारियों ने भी कोई फायदा न होने से दिलचस्पी नहीं ली। जबकि, डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने 31 मार्च तक हर हाल में राहत राशि के वितरण के लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम को दो बार पत्र लिखकर हिदायत दे चुके हैं। हालत यह है कि राहत राशि वितरण की पहली किस्त के रूप में तीनों तहसीलों को दी गई छह करोड़ 52 लाख छह हजार 238 रुपये भी किसानों के खाते में नहीं पहुंच पाए हैं।