गाजीपुर में मनोज सिन्हा के बढ़ते वर्चस्व और कृष्णानंद राय की जीत से मुख्तार अंसारी खेमा बौखला गया। 2004 का लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो खूनी जंग एक बार फिर शुरू हुई। फरवरी 2004 में कृष्णानंद राय के खास रहे अक्षय कुमार राय उर्फ टुनटुन पहलवान की गाजीपुर में सरेआम हत्या कर दी गई। 26 अप्रैल 2004 को कृष्णानंद राय के करीबी झिनकू की हत्या कर दी गई। फिर मोहम्मदाबाद रेलवे फाटक के समीप भाजपा कार्यकर्ता शोभनाथ राय की हत्या कर दी गई।
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27 अप्रैल 2004 को दिलदारनगर में रामऔतार पर अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई। लोकसभा चुनाव के बाद बाराचवर विकास खंड मुख्यालय पर कृष्णानंद राय के करीबी अविनाश सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। अक्तूबर 2005 में एक मामले में अपनी जमानत रद्द करा कर मुख्तार अंसारी जेल चला गया। इसके लगभग एक माह बाद नवंबर 2005 में कृष्णानंद राय और उनके काफिले में शामिल सात अन्य लोगों पर 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया था।
मऊ कचहरी परिसर में मुख्तार अंसारी (फाइल)
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गाजीपुर के बसनियां गांव में 29 नवंबर 2005 को एके-47 से अंधाधुंध गोलियां बरसाकर तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गई थी। उस समय मुख्तार अंसारी गाजीपुर जेल में बंद था। वारदात को अंजाम देने वालों में मुख्तार अंसारी गिरोह के शूटरों में मुख्य रूप से अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर, संजीव जीवा उर्फ माहेश्वरी, मुन्ना बजरंगी, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय विश्वास नेपाली और रिंकू तिवारी शामिल थे।
इनमें से मुन्ना बजरंगी, राकेश पांडेय और रिंकू तिवारी मारे जा चुके हैं। वहीं, अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर अब भी फरार है और उस पर दो लाख का इनाम घोषित है। इसी तरह से विश्वास नेपाली भी फरार है और उस पर 50 हजार का इनाम घोषित है।