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कृष्णानंद राय हत्याकांड: विरोध में राजनाथ सिंह 14 दिन घरने पर बैठे थे, बलिया से प्रयागराज तक हुआ था बवाल

Sat, 29 Apr 2023 11:39 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

25 नवंबर 2005 को कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गई थी। घटना के विरोध में मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 14 दिन धरने पर बैठे थे।  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी बनारस आए थे। 
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कृष्णानंद राय और मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृष्णानंद राय के बूते ही भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2002 में पहली बार गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद सीट पर जीत दर्ज की थी। कृष्णानंद राय ने अफजाल अंसारी के 17 वर्ष के राजनीतिक दबदबे को खत्म कर पूर्वांचल में एक अलग पहचान बनाई थी।

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25 नवंबर 2005 को कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गई तो उसके विरोध में मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जिला मुख्यालय पर 14 दिन तक धरना दिए थे। उस दौरान विरोध दर्ज कराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी बनारस आए थे। अटल बिहारी को सुनने के लिए जनसमूह उमड़ पड़ा था।

वाराणसी में जमकर हुआ था प्रदर्शन

80 के दशक में बीएचयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का संगठन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले कृष्णानंद राय को भाजपा में शामिल कराने का श्रेय मनोज सिन्हा को दिया जाता है। कृष्णानंद राय की हर वर्ग में स्वीकार्यता थी। उनकी हत्या के विरोध में उनके समर्थकों ने वाराणसी में कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस के साथ ही आसपास के इलाके में तोड़फोड़ करने के अलावा रामनगर का पीपा पुल खोल दिया था। 
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कृष्णानंद राय - फोटो : सोशल मीडिया
पन्नालाल पार्क विद्युत उपकेंद्र में एक जीप फूंक दी गई थी। अस्सी पोस्ट ऑफिस पर जमकर तोड़फोड़ की गई थी। लंका, दुर्गाकुंड, कमच्छा, भिखारीपुर, भोजूबीर, शिवपुर, गोदौलिया सहित शहर के अधिकांश इलाकों में मुलायम सिंह यादव का पुतला फूंक कर तोड़फोड़ की गई थी। वाराणसी से गाजीपुर होते हुए गुजरने वाली 250 बसों का परिचालन ठप हो गया था। इसके साथ ही बलिया से लेकर मऊ, गाजीपुर होते हुए प्रयागराज तक कृष्णानंद राय समर्थकों का गुस्सा जमकर देखने को मिला था।

वाराणसी के कारोबारी नंदकिशोर रूंगटा की अपहरण के बाद हत्या

नंद किशोर रूंगटा का घर - फोटो : अमर उजाला
जनवरी 1997 में कोयला व्यापारी और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कोषाध्यक्ष नंदकिशोर रूंगटा का उसके घर से अपहरण कर लिया गया था, फिर हत्या कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, रूंगटा के परिवार से पांच करोड़ रुपये की फिरौती की मांगी गई थी। परिवार ने 1.5 करोड़ रुपये दे भी दिए थे। इसके बावजूद रूंगटा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में माफिया मुख्तार अंसारी का नामजद किया गया था। मुख्तार के गैंगचार्ट में भी इस हत्याकांड का ब्योरा दर्ज है। हत्या के बाद नंद किशोर का शव तक नहीं मिला था।

भाजपा विधायक सहित सात लोगों की हत्या में भी मुख्तार-अफजाल नामजद

मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की 29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाना क्षेत्र के सियाड़ी गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि माफिया मुख्तार अंसारी, उसके भाई व बसपा सांसद अफजाल अंसारी और बहनोई एजाजुल हक ने एके-47 से 400 राउंड से ज्यादा राउंड फायरिंग की थी।
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इस मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ मोहम्मदाबाद थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही एक आरोपी एजाजुल हक की मौत हो गई, जबकि माफिया मुख्तार अंसारी और उसके सांसद भाई अफजाल अंसारी के खिलाफ सुनवाई जारी है।
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