अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण जिस व्यक्ति के नाम पर है, वह कभी अस्पताल में मौजूद नहीं मिलता। निरीक्षण के दौरान भी संचालक मौके पर नहीं मिला और कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हो गया। अस्पताल के संचालन और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अनियमितताएं और अवैध गतिविधियां प्रमाणित होती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि अस्पताल की गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अस्पताल और उसकी दवा दुकान को सीज किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिले में बिना मानकों के संचालित अस्पतालों और अवैध चिकित्सा गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने जिले के कई निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया था, जिसमें दो अन्य अस्पतालों पर भी सील की कार्रवाई की गई थी।