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कोविड हॉस्पिटल में दो बालवीरों ने दी कोरोना को मात

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वाराणसी। कोरोना संक्रमण की जद में जिस तरह से बच्चे आते जा रहे हैं, अब उनको लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। खास कर 10 साल से कम उम्र के बच्चों को घर से बाहर ना निकलने को भी कहा गया है। इस बीच कोरोना बालवीर जो कोरोना को मात देकर बाहर आए हैं, उनकी घर पर भी सेहत की विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है। अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें घर जैसा माहौल मिला तो डॉक्टरों-पैरामेडिकल स्टाफ भी पल-पल मॉनिटरिंग करते रहे। यही कारण रहा कि बच्चों ने आसानी से जंग जीत लिया।
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कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक यह बात सही है कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है लेकिन उनके इलाज में कोई जटिलता नहीं होती है। बड़े लोगों में पहले से भी बीमारियों के होने से थोड़ी अधिक सावधानी बरतनी पड़ती है। भगवान का शुक्र है कि बच्चे मां के पास रहे और किसी तरह की कोई असुविधा नहीं हुई। बता दे कि बीएचयू और कोविड हॉस्पिटल में बच्चों को उनके मां के पास ही रखा गया और परिवार के अन्य संक्रमित सदस्य भी एक ही ब्लॉक में रहे।
पोस्ट डॉक्टोरल छात्रा का बेटा भी बना बालवीर
आईएमएस बीएचयू की पोस्ट डॉक्टोरल छात्रा के साथ ही कोरोना की जद में आये एक साल के बेटे ने भी कोरोना को मात दिया। तीन मई को कोरोना की पुष्टि होने के बाद से ही बेटे को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था, जहां अस्पताल की स्टाफ नर्स और अन्य लोग बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देते रहे, जिससे कि उन्हें कोई तकलीफ ना हो। अब वो घर पर आ गया है, तो यहां भी ख्याल रखा जा रहा है।
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होटल में पिता, हॉस्पिटल में मां के साथ जंग लड़ता रहा बालवीर
मड़ौली निवासी दवा कारोबारी के डेढ़ साल के भांजे ने कोरोना को मात दिया। उनके पिता भी कोविड हॉस्पिटल में संक्रमित मरीजों के इलाज में लगे रहे। इस वजह से वह घर नहीं जा सकते थे। नियमानुसार हॉस्पिटल में रहना पड़ा। बातचीत में डाक्टर पिता ने बताया कि बेटा अब बिल्कुल स्वस्थ है। हॉस्पिटल में मां और पूरे परिवार के साथ 13 दिन तक जंग लड़कर जितने के बाद उसे डिस्चार्ज किया गया। उसके खुशी का ठिकाना न था। मां की गोद में रहकर कोरोना को मात देने वाले इस बालवीर की अस्पताल में भी लोगों का खूब ख्याल रखा गया।
बच्चों के सेहत पर विशेष सतर्कता जरूरी
बीएचयू में बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर विनीता गुप्ता का कहना है कि कोरोना संक्रमित बच्चा हो या बड़ा सभी की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें खासकर बच्चों पर ज्यादा। इनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम रहती है। लेकिन इनके इलाज में कोई दिक्कत नहीं होती है। घर हो या बाहर हर जगह सावधानी बरतने की जरूरत है।
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ये बरतें सावधानी
बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें।
घर में साफ-सफाई की नियमित मॉनिटरिंग जरूरी।
संक्रमण के दौर में खान पान पर भी ध्यान दें।
बाहर से आने के बाद स्नान और बिना सैनिटाइज्ड किए बच्चों को न छुए।
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