बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के बड़े व प्रमुख मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भी पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। सिद्दीकी के साथ उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सिद्दीकी की बर्खास्तगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
साथ ही उनके अगले कदम को लेकर सियासी कयासबाजी तेज हो गई है। निष्कासित किये जाने की चर्चा राजनीतिक हल्के में तेज है। हर कोई बसपा मुखिया मायावती के इस निर्णय को लेकर हतप्रभ है। वहीं इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। सभी का मानना है कि इस निर्णय से बसपा के मुस्लिम वोटर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राबर्ट्सगंज के पूर्व विधायक बसपा नेता सत्यनारायण जैसल कहते हैं कि नसीमुद्दीन और उनके बेटे को पार्टी से निकाले जाने का निर्णय काफी सोच समझ कर लिया गया होगा। मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर नसीमुद्दीन को बाहर निकाला है। कोई भी नेता विरोधी गतिविधियों वाले को बर्दाश्त नहीं करता है। इसलिए उनके निकाले जाने से मुस्लिम वोट प्रभावित नहीं होंगे।
जिलाध्यक्ष बी.सागर कहते हैं कि बसपा मुखिया ने नसीमुद्दीन को उनके क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में काफी खराब प्रदर्शन के चलते बाहर किया है। इससे न तो मुस्लिम वोटर प्रभावित होंगे और न ही संगठन पर इसका कोई असर पड़ेगा। मुखिया का निर्णय स्वागत योग्य है।
पार्टी के जिला संरक्षक एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख बभनी कासिम हुसैन का कहना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी नेता नहीं मैनेजर थे। उनका बसपा से निष्कासन सही है। मायावती का यह निर्णय सही है। इससे मुस्लिम वोटों पर कोई असर नहीं होगा।
रंगनाथ मिश्र की सच्चर कमेटी में मुसलमानों की माली हालत दलितों से नीचे बताई गई, फिर भी नसीमुद्दीन ने मुस्लिमों के हक में कोई बेहतर कार्य नहीं किया। फिर वे मुसलमानों को नेता कैसे हो सकते हैं।