भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी विश्व की तीन लोक से न्यारी काशी में मां आद्य शक्ति अदृश्य रूप में दुर्गाकुंड मंदिर में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि शुंभ और निशुंभ राक्षसों का वध करने के बाद मां दुर्गा ने यहां विश्राम किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार काशीराज सुदर्शन के पक्ष में एक बार देवी कूष्मांडा ने स्वयं शेर पर सवार होकर युद्ध किया था। इसके बाद राजा सुदर्शन ने मां से काशी में विराजमान होने की प्रार्थना की थी। मंदिर का जीर्णोद्धार 1760 ई0 में रानी भवानी ने कराया था।