बीएचयू स्वतंत्रता भवन बुधवार को मंच मौर्य सल्तनत की आखिरी पीढ़ी का गवाह बना। बृहद्रथ की विलासिता की प्रवृत्ति और हिंसा पर अहिंसा की विजय का उसका ढोंगपन देश को खतरे में डाल रहा था। विदेशी रानी अनटोनिया के प्रेम जाल में फंसकर राजा अपने देश का देश का विकास न कर जब विदेशों में धन व्यय करने लगा तो उसके सेनापति ने उसका विद्रोह किया। लेकिन राजा नहीं माना अंतत: देश को बचाने के लिए सेनापति ने अपने राजा का वध कर भारत मां का ‘रक्त अभिषेक’ किया।
करीब पौने दो घंटे के डीपी सिन्हा द्वारा लिखित इस नाटक ने सभी दर्शकों को अंत तक उसकी कहानी, उसके पात्रों से बांधे रखा। समूहन कला संस्थान, संस्कृति मंत्रालय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार से शुरू हुए तीन दिवसीय समूहन राष्ट्रीय भ्राम्यमान नाट्य समारोह ‘रंगोत्सव’ का आगाज ‘रक्त अभिषेक’ नाटक के साथ शुरू हुआ।
निदेशक डीपी सिन्हा के मौर्य राजा बृहद्रथ के काल से संबंधित इस नाटक में इतिहास सजीव हो उठा।
हर एक पात्र ने अपने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। इस समारोह का उद्घाटन बीएचयू कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी, रोटरी क्लब के मंडलाध्यक्ष वेद प्रकाश ने किया। नाटक में राजा की भूमिका दीपक कुमार, सेनापति पुष्यमित्र की भूमिका जमशेद खान, अनटोनिया की भूमिका पूजा ध्यानी सहित अलग -अलग भूमिका में जितेंद्र हांडा, रोहित त्रिपाठी, राहुल गुप्ता, प्रवीण कुमार, गौतम जायसवाल, सुरजीत सिंह, नितिन खोलिया, विकास नेगी आदि रहे। प्रकाश संयोजन राजनारायण दीक्षित, संगीत मुकेश झा, मेकअप हरीश खोलिया का रहा।