फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छह दिन से नहीं गए थे साइट पर, 16 घंटे पहले भुगतान के लिए गिड़गिड़ाए

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। पीडब्ल्यूडी से निर्माण कार्य के पांच करोड़ रुपये का भुगतान न होने के कारण ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव अवसाद ग्रस्त हो गए थे। अवधेश के चालक बसंत के अनुसार, वह छह दिनों से कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल की साइट पर नहीं जा रहे थे। बुधवार सुबह तक सब कुछ सामान्य था। अचानक वह आत्मघाती कदम उठाएंगे, ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।
विज्ञापन

अवधेश के सुसाइड नोट के अनुसार, बकाया भुगतान न होने के कारण वह आर्थिक तंगी का शिकार हो गए थे। उन्होंने पत्नी प्रतिभा के जेवर भी गिरवी रख दिए थे और बाजार व बैंक का भी उन पर कर्ज था। उन्हें उम्मीद थी कि विभागीय अभियंता भुगतान कराएंगे तो उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन ऐसा संभव न हो सका। 27 अगस्त की शाम करीब सात बजे उन्होंने पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता सतीश चंद्र वर्मा से मुलाकात कर बकाया भुगतान की गुहार लगाई थी। इस पर अधिशासी अभियंता ने मेजरमेंट रिपोर्ट न होने का हवाला देकर जेई को बुलाया था। इसके बाद रात भर में अवधेश ने न जाने क्या सोचा और लगभग 16 घंटे बाद पीडब्लूडी ऑफिस जाकर उन्होंने खुदकुशी कर ली।
उधर, अवधेश के कारोबार के साझीदार अरविंद सिंह ने कहा कि बकाया भुगतान हो जाता तो यह दिन न देखना पड़ता। भुगतान न होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। बीते एक साल से पति-पत्नी की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। सप्लायरों के फोन और तगादा से वह परेशान हो गए थे। इन सबके पीछे की अहम वजह पीडब्ल्यूडी के अभियंता और विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार है।
विज्ञापन

चीफ इंजीनियर के कमरे में चार मिनट तक आखिर क्या हुआ था...?
चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के अनुसार, अवधेश उनके कमरे में आए और परिचय देकर खुद को गोली मार लिए। वहीं, विभाग के कर्मचारियों और वहां मौजूद ठेकेदारों के अनुसार, अवधेश चीफ इंजीनियर के कमरे में घुसे। इसके तीन से चार मिनट बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इन तीन से चार मिनट में क्या हुआ, यह तफ्तीश का विषय है। आशंका जताई गई कि कहीं अवधेश के रिवाल्वर निकालने पर छीनाझपटी में तो गोली नहीं चली। कैंट पुलिस ने भी इसे जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना है। उधर, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी स्थित अभियंताओं के कमरे से करोड़ों रुपये का काम होता है, इसके बावजूद कहीं सीसी कैमरे नहीं दिखे। इसे लेकर कैंट इंस्पेक्टर से लेकर एसएसपी तक हैरत में रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि जहां हमेशा झगड़े की आशंका रहती है और हत्या भी हो चुकी हैं, वहां सीसी कैमरों का न लगा होना आश्चर्यजनक है।
सीट पर सुसाइड नोट रख कर बोले- अरविंद को दे देना
कार से उतरते समय अवधेश ने अपनी सीट पर छह पन्नों का सुसाइड नोट रखा। चालक बसंत से कहा कि यह कागज अरविंद को दे देना। बसंत को कुछ समझ में नहीं आया तो उसने कहा कि अभी आप लौट कर आएंगे तो दे दिया जाएगा। इस पर अवधेश कुछ नहीं बोले। इसके पांच से छह मिनट बाद चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी और लोग बाहर की ओर दौड़े। इसके बाद बसंत को अवधेश की आत्महत्या की जानकारी हुई।
ठेकेदार शिकायतें लिख कर दें, जांच में करेंगे शामिल : एसएसपी
तफ्तीश के बाद करीब 2:30 बजे एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने पीडब्लूडी के ठेकेदारों से मुलाकात की। इस दौरान ठेकेदारों ने अभियंताओं पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। एसएसपी ने आश्वस्त किया कि ठेकेदार शिकायतें लिख कर दें। इन्हें अवधेश की आत्महत्या से संबंधित मुकदमे की जांच में शामिल कर सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी के निकलने के बाद ठेकेदारों ने हंगामा करने की कोशिश की तो पुलिस ने शांत करा दिया।
मुन्ना बजरंगी के खिलाफ कैंट थाने में दी थी तहरीर
पीडब्ल्यूडी के ठेकेदारों ने बताया कि अवधेश पेशे से उलट बेहद सीधेसादे व्यक्ति थे। सभी से प्रेम से मिलना और हालचाल पूछना उनकी आदत में शुमार था। अवधेश ठेकेदारी के दौरान माफिया से भी नहीं दबे। चार-पांच साल पहले उन्होंने मुन्ना बजरंगी और पूर्वांचल के एक बाहुबली विधायक के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस कर कैंट थाने में तहरीर दी थी। अवधेश कहते थे कि मेहनत कर आगे बढ़े हैं, न दबेंगे और न किसी के आगे झुकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें