काशी विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी प्रसाद का वितरण
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर गोरक्षनाथ मंदिर की परंपरा शुरू हुई। बाबा विश्वनाथ पहली बार 501 किलो खिचड़ी का भोग लगाया गया। गोरक्षनाथ मंदिर का प्रसिद्ध खिचड़ी महोत्सव के बारे में कई मान्यताएं हैं।
मान्यताओं के अनुसार हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में बाबा गोरखनाथ की मुलाकात ज्वाला देवी से हुई। ज्वाला देवी ने बाबा से कहा था कि आज खिचड़ी बनेगी उसी का भोग लगेगा। उसके बाद ज्वाला देवी ने आग जलाई और उस पर पतीले में पानी भी चढ़ा दिया।
उसी दौरान बाबा गोरखनाथ ने ज्वाला देवी से कहा कि वह भिक्षाटन के लिए निकल रहे हैं ताकि खिचड़ी योग्य अनाज जुटाया जा सके। लेकिन बाबा कांगड़ा से निकले और खिचड़ी के लिए भिक्षाटन करते हुए गोरखपुर पहुंच गए। यहीं वह एक स्थान पर बैठ गए।
लोग उनके भिक्षा पात्र में अनाज डालते गए पर वह पात्र भरता ही नहीं था। ऐसे में गोरखनाथ वापस कांगड़ा गए ही नहीं। कहा यह भी जाता है कि कांगड़ा में ज्वाला देवी मंदिर के पास एक कुंड है जिसका पानी खौलता रहता है।
पुरनिये बताते हैं कि दरअसल वहीं पर ज्वाला देवी ने खिचड़ी के लिए अदहन (आग पर पानी चढ़ाना) चढ़ाया था। वह आज भी गोरखनाथ के भिक्षाटन कर लौटने का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में हर साल मकर संक्रांति पर गोरक्षनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव धूम धाम से मनाया जाता है।
लोग सुबह से ही स्नान ध्यान कर दाल चावल ले कर वहां पहुंचने लगते हैं। मंदिर परिसर में लोग खुद भी खिचड़ी बनाते और खाते हैं। साथ ही मंदिर प्रशासन की ओर से भिक्षुओं और अन्य लोगों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है।
सबकी चाहत मुझे मिले प्रसाद
प्रसाद ग्रहण करते भक्त
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मकर संक्रांति पर पहली बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में गोरक्षनाथ मंदिर की तर्ज पर खिचड़ी उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर बाबा को 501 किलो खिचड़ी का भोग लगाया गया। प्रसाद लेने के लिए बाबा दरबार में भक्तों का रिकार्ड रेला उमड़ा।
विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव की एक नई पहल शुरू हो गई। सोमवार को मकर संक्रांति पर भोग आरती में खिचड़ी का भोग लगाकर बाबा के भक्तों को खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया।
भोग आरती के यजमान कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण व उनकी पत्नी श्रीला गोकर्ण ने भक्तों में खिचड़ी के प्रसाद का वितरण किया। देर शाम तक लगभग 30 हजार से अधिक भक्तों ने बाबा का खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया।
बाबा का खिचड़ी प्रसाद पाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा और लोग कतारबद्ध होकर प्रसाद पाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे। खिचड़ी भोग पकाने के लिए ज्ञानवापी परिसर स्थित मिर्जापुर मठ के पास चूल्हा लगाया गया था। इस अवसर मंदिर की डायरी का भी विमोचन किया गया।
मौके पर न्यास परिषद के अध्यक्ष अशोक द्विवेदी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एस.एन.त्रिपाठी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी निखिलेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। यह व्यवस्था कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने लागू की है।
विश्वनाथ मंदिर का खिचड़ी से कोई खास सरोकार कभी नहीं रहा है, जबकि गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखनाथ और खिचड़ी के बीच गहरा संबंध है। गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति को विशेष उत्सव मनाया जाता है।
श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है वो बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं और मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है। वहां यह मेला महीने भर तक चलता है।