कश्मीर में महिलाओं की आजादी पर तमाम तरह के प्रतिबंधों की बात भले सामने आती हो लेकिन वहां की महिला क्रिकेट खिलाड़ियों ने ऐसी बातों को सिरे से खारिज किया। टेनिस बाल क्रिकेट चैंपियनशिप में भाग लेने काशी आईं जम्मू-कश्मीर की इन खिलाड़ियों ने कहा कि उनके यहां हर सही काम के लिए पूरी आजादी है।
क्रिकेट खेलने पर उन्हें फतवे नहीं मिलते बल्कि घर-परिवार और समाज से प्रोत्साहन मिलता है। लोग उनकी तारीफ करते हैं। चैंपियनशिप में शिरकत करने महमूदा हसन के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर की महिला क्रिकेट टीम यहां आई है।
महमूदा के अलावा मीनाज खालिक, आसिमा, नादिया, रेखा, ललिता, विस्मा, मुस्कान, महक, जारका, हीना, शबनम, गरिमा, संजना, ललिता, पिंकी, शबनम ने बुधवार को सिगरा स्टेडियम में ‘अमर उजाला’ से बातचीत की।
उनका कहना था कि उनके परिवार के लोग उन पर गर्व करते हैं। वे दूसरे राज्यों में क्रिकेट खेलने जाती हैं लेकिन कभी किसी तरह की रोकटोक नहीं हुई। पर्दा प्रथा उनके खेल की राह में आड़े नहीं आई। न परिवार न समाज ने कभी एतराज जताया।
कहा कि कश्मीर में युवा प्रतिभाओं के लिए शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भरपूर संभावनाएं हैं। वहां के युवा आगे बढ़ना चाहते हैं। देश में अपनी पहचान कायम करना चाहते हैं। कहा कि काशी में उन्हें खूब प्यार मिला।
मौका मिला तो वे यहां दोबारा जरूर आएंगी। शाम को घाट घूमने और गंगा आरती के भव्य नजारे को वे कभी भूल नहीं पाएंगी। तीन तलाक के मुद्दे पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार किया।