उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार पाकर काशी की सात विभूतियों ने कला को नई पहचान दिलाई। इसमें संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह को संगीत और कला के उन्नयन के लिए संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया। वहीं पांच अन्य कलाकारों ने भी राज्यपाल के हाथों पुरस्कार पाकर काशी का मान बढ़ाया।
वर्ष 2020 के लिए मिलने वाले पुरस्कारों की घोषणा बीते साल 2022 में की गई थी। युवा रंगकर्मी विपुल कृष्ण नागर को सफदर हाशमी पुरस्कार मिला। लोककला नौटंकी में अष्टभुजा मिश्र, तबला वादन में विनोद लेले और शहनाई में उस्ताद फतेह अली खां ने अकादमी पुरस्कार प्राप्त किया। वरिष्ठ रंगकर्मी कुंवरजी अग्रवाल को मरणोपरांत सम्मान दिया गया। उनके बेटे ने ये पुरस्कार ग्रहण किया। कथक में विशाल कृष्ण को भी अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है।
यह सम्मान मां गंगा और संगीत की सेवा का सम्मान है। पुरस्कार मेरा नहीं पूरे काशीवासियों का है। अकादमी पुरस्कार पाना मेरे लिए बड़ी बात है। कला के क्षेत्र में काशी का नाम देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। अब इस सम्मान से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। - प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत संकट मोचन मंदिर
ये सम्मान मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। कला और संगीत की सेवा साधना को जारी रखने की दिशा में हर संभव प्रयास किया जाएगा। काशी का मान बढ़ाने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए ये सम्मान महत्वपूर्ण है। - अनंत नारायण सिंह, काशीराज परिवार
काशी की धमक हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है। संगीत और कला को पहचान दिलाने के लिए सदैव प्रयासरत हूं। इस तरह के सम्मान मिलने से आगे बढ़ने का बल मिलेगा। - विशाल कृष्ण, कथक
राज्यपाल के हाथों संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार पाना बड़ी उपलब्धि है। पुरस्कार की घोषणा के बाद से इस क्षण का इंतजार था। इस अनुभव अविस्मरणीय है। - अष्टभुजा मिश्रा, नौटंकी
ये पुरस्कार मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। सफदर हाशमी सम्मान मिलने के बाद कला को नई पहचान दिलाने की मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। सम्मान से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली। - विपुल नागर, रंगकर्मी
तबला वादन के क्षेत्र में संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार मिलने के बाद जो खुशी हैं, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं। मेरे लिए यादगार दिन है। - विनोद लेले, तबला वादन
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने अपनी कला की जो मिसाल पेश की है, लोग उसे कभी भुला नहीं सकते हैं। इस विधा में मुझे जो पुरस्कार मिला है, वह मेरे लिए गौरव का क्षण है। - उस्ताद फतेह अली खां, शहनाई