जलाभिषेक से चमके शिखर,बाबा दरबार में गूंजा जयघोष
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काशी विश्वनाथ मंदिर के 240 सालों के इतिहास में पहली बार हुए कुंभाभिषेक के दौरान गंगा के अभिमंत्रित जल से अभिषेक के बाद स्वर्ण शिखरों की आभा और चमक उठी।
दो सौ कलशों के साथ मंत्र जाप करते दक्षिण भारतीय ब्राह्मण और हर-हर महादेव का जयघोष करते सैकड़ों भक्त जब काशी पुराधिपति विश्वनाथ मंदिर पहुंचे तो पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। भक्त भक्तिभाव में सराबोर होकर बार-बार मंदिर परिसर में मत्था टेकते रहे।
गुरुवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर के कुंभाभिषेक महोत्सव का समापन महाभिषेकम के साथ हुआ। मंदिर के 240 सालों के इतिहास में पहली बार हुए कुंभाभिषेक के दौरान गंगा के अभिमंत्रित जल से अभिषेक के बाद स्वर्ण शिखरों की आभा और चमक उठी।
कुंभाभिषेकम उत्सव के मुख्य आयोजन का श्रीगणेश यज्ञ मंडप में स्थापित देवताओं एवं जल कलश के पूजन व हवन से हुआ। मंडप में उपस्थित दक्षिण भारतीय एवं काशी के ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का सस्वर पाठ निरंतर चल रहा था।
इसके पश्चात सोम कलश पूजन एवं चातुर्वेद पारायण भी संपन्न हुआ। दो सौ कलशों में अभिमंत्रित गंगा के जल से विश्व कल्याण की कामना से कुंभाभिषेक के तहत स्वर्ण शिखरों की विमान अभिषेक की प्रक्रिया आरंभ हुई।
इसके पश्चात मंदिर में स्थापित अन्य देव विग्रहों का भी विधिवत पूजन किया गया। कुंभाभिषेक के उपरांत महाआरती कर भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया। कुंभाभिषेक की पूजा अर्चना पिच्चाई शिवाचार्य, कार्तिक वेंकटरमन घनपाठी, श्रीकांत आचार्य, शृंगेरी मठ के चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद राव एवं कांची कामकोटि पीठ के वी चंद्रशेखर के आचार्यत्व में संपन्न हुआ।