काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्त प्रतिदिन हजारों लीटर दूध से बाबा का अभिषेक करते हैं। जब दूध कम हुआ तो लोग पैकेट वाला दूध शिवलिंग पर चढ़ाने लगे। इसे देखते हुए एक कंपनी ने मंदिर परिसर के अंदर एक कांउटर खोला। यहां दूध और पेड़ा की बिक्री शुरू हुई।
न्यास के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने अब पैकेट वाले दूध को अशास्त्रीय बताया है। उन्होंने कहा कि पाश्चुराइजेशन प्रक्रिया के दौरान दूध को पहले निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है। फिर ठंडा कर पैकेट में भरा जाता है।
इस दूध में फैट और अन्य पोषक तत्व मेंटेन किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पूजा में गर्म दूध नहीं चढ़ाया जाता है, इसलिए पैकेट वाला दूध का पूजन में प्रयोग नियमों के विरुद्ध है। इसीलिए पैकेट वाले दूध को प्रतिबंधित करने के लिए कहा गया है।