वाराणसी। शिवभक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र काशी विश्वनाथ धाम ने देश को अधिग्रहण कानून का नया मॉडल दिया है। धाम के निर्माण में 400 मकानों को खाली कराकर वहां रहने वालों को विस्थापित करने का पूरा अभियान सहमति के आधार पर पूरा किया गया। यही कारण रहा कि 800 करोड़ रुपये से काशी विश्वनाथ धाम के भव्य धाम का सपना समय पर साकार हो सका। काशी का यह मॉडल देश के सामने नजीर बना और विंध्याचल के विंध्य धाम व रामलला के दरबार में भी इसी नियम को लागू किया गया।
वर्ष 2017 में काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना तैयार हुई तो करीब 400 मकान व दुकान को हटाकर इसे साकार करने की योजना बनाई गई। गलियों में बसे काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास के मकान व दुकानों को खाली कराना बड़ी चुनौती थी। मगर, काशी विश्वनाथ धाम के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण के बजाय उसके खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई। सहमति के आधार पर एक-एक करके 401 मकान व दुकान की खरीद की गई। सबसे अहम बात यह भी है कि 400 करोड़ रुपये की खरीद में ना तो किसी तरह का विवाद सामने आया और ना ही किसी तरह के असंतोेष पर एक भी वाद न्यायालय तक पहुंचा।
करीब दो वर्ष तक चली इस खरीद प्रक्रिया में महादेव के धाम की जमीन तैयार कर ली गई। चार वर्ष में ही पांच लाख वर्ग फीट का भव्य धाम दुनिया भर के भक्तों के लिए तैयार किया गया। यहां बता दें कि काशी विश्वनाथ धाम के लिए संपत्तियों की खरीद की प्रक्रिया को ही मिर्जापुर के विंध्याचल और अयोध्या में रामलला के दरबार में लागू किया गया है। तत्कालीन धर्मार्थ कार्य मंत्री और दक्षिणी विधायक डाॅ. नीलकंठ तिवारी ने बताया कि काशीवासियों के सहयोग से धाम का काम समय पर पूरा हुआ। इसमें सरकार की ओर से यह सख्त सलाह भी दी गई थी कि नेक काम नेक तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
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वन स्टॉप साॅल्यूशन ने विश्वास को किया प्रगाढ़
काशी विश्वनाथ धाम के लिए संपत्तियों की खरीद के लिए प्रशासन ने वन स्टॉप साॅल्यूशन की अवधारणा को लागू किया। इसमें मंदिर परिसर में ही संपत्ति के मालिकों से वार्ता, रजिस्ट्री और भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें संपत्तियों की खरीद में 390 करोड़ रुपये और पुनर्वास के लिए 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ट्रस्ट और मंदिर से जुड़ी संपत्तियों को वार्ता के आधार पर धाम का हिस्सा बनाया गया है।
काशी विश्वनाथ धाम के लिए जमीन खरीद के लिए समन्वय, सहमति और विश्वास को आधार बनाया गया। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समय-समय पर इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा भी करते रहे। लोगों के विश्वास को प्रगाढ़ करने के लिए वन स्टॉप साल्यूशन के आधार पर काम किया गया। - दीपक अग्रवाल, तत्कालीन मंडलायुक्त