श्री काशी विश्वनाथ के बाद घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में धाम के 18 देवों के दर्शन क्रम का बोर्ड और मैप लगा। नंबर एक पर बाबा विश्वनाथ, आठवें पर नंदी और 11वें पर ज्ञानवापी कूप का क्रम आता है।
श्रीकाशी विश्वनाथ के बाद ज्ञानवापी कूप और बड़े नंदी के दर्शन के लिए श्रद्धालु सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं लेकिन मंदिर प्रशासन के अनुसार विश्वनाथ जी के दर्शन के बाद वहां मौजूद 18 देवालयों तक पहुंचना होता है। इसमें आठवें नंबर पर ज्ञानवापी की ओर मुख किए बड़े नंदी और 11वें नंबर पर ज्ञानवापी कूप के दर्शन का क्रम आता है।
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बाबा के मुख्य परिसर में देवी-देवताओं का वास है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में दिव्य देवालय और दर्शन क्रम दर्शाने वाला नया बोर्ड लगाया गया है। इससे श्रद्धालुओं को धाम के भीतर स्थित प्रमुख मंदिरों और देवालयों की जानकारी दी जा रही है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन पाने के बाद भक्तों को एंटी क्लॉक वाइज यानी कि घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में 18 देवों तक पहुंचना होगा। मंदिर प्रशासन ने इन देवताओं के दर्शन का एक क्रम निर्धारित कर मुख्य मंदिर का पूरा मैप जारी किया है और इसकी नंबरिंग की है।
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क्यूआर कोड स्कैन करके भी देखें क्रम
मैप वाले बोर्ड पर एक क्यूआर कोड भी लगाया गया है जिसे स्कैन कर क्रम को जाना जा सकता है। हालांकि, क्लिक करने पर मंदिर की विशिष्टता के बारे में पता नहीं चल रहा है। वहां लिखकर आ रहा है कि विवरण जल्द ही जारी की जाएगी।
दूसरे पर तारकेश्वर और सबसे अंत में गंगा, यमुना, सरस्वती, गणेश के दर्शन
सबसे पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने होंगे। उनके बाद तारकेश्वर जी, नवग्रह मंडप, भुवनेश्वर जी, बद्रीनारायण, माता अन्नपूर्णा, भैरव जी, कुबेरेश्वर, बड़े नंदी और व्यासेश्वर के दर्शन करने हैं। इनके बाद श्री ज्ञान विनायक, ज्ञानवापी कूप, माता पार्वती व निकुंभ विनायक, श्री विघ्न नायक गणेश जी, अक्षयवट हनुमान जी, दंडपाणी (लिंगरूपी), श्री विष्णु जी, विरुपाक्षेश्वर, वैकुंठ, श्री सत्यनारायण और माता महालक्ष्मी और अंत में माता गंगा, यमुना और सरस्वती और गणेश जी के दर्शन करने होंगे।