एक किलोमीटर लंबे इस क्षेत्र से श्रद्धालु स्नान करके आसानी से मंदिर तक दर्शन पूजन करने के लिए जा सकेंगे। यहां दुकानें, वेद विज्ञान शाला, कम्युनिटी हाल, सोविनियर शॉप, हेल्प डेस्क, कार्यालय, कंट्रोल रूम, संग्रहालय, यज्ञशाला का निर्माण होना है। साथ ही मुमुक्षु भवन का निर्माण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
339 करोड़ रुपये की है परियोजना
काशी विश्वनाथ धाम में निर्माण कार्यों पर 339 करोड़ रुपये खर्र्च किए जाएंगे। इससे पहले मंदिर क्षेत्र के विस्तारीकरण के लिए चिह्नित 296 भूमि-भवनों को खरीदने के लिए 2017-18 में 40 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2018-19 में 358.33 करोड़ रुपये जारी किए गए। मंदिर प्रशासन ने अब तक कुल 268 संपत्तियां खरीदीं। इनमें से 247 भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है।
अहिल्याबाई होल्कर ने अंतिम बार कराया था जीर्णोद्धार
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार अंतिम बार इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में कराया था। वर्ष 1785 में प्रथम गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग के आदेश पर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद इब्राहिम खान ने मंदिर के सिंहद्वार के सामने नौबत खाना बनवाया था।
यहां प्रतिदिन भोग के समय नगाड़ा और शहनाई बजती थी। पंजाब केसरी महाराणा रणजीत सिंह ने 1839 में इस मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित करवाया। 28 जनवरी 1983 को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर का अधिग्रहण किया और इसके प्रबंध का कार्य ट्रस्ट की कार्यपालक समिति को सौंप दिया।