महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को अब डिग्रियां उनके महाविद्यालय से ही प्राप्त हो जाएंगी। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय का चक्कर काटने से निजात मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2016 से 2021 तक पांच लाख से अधिक उपाधियों को तैयार कराया है और महाविद्यालयों को अपनी डिग्रियां ले जाने के लिए पत्र लिखा है।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नवरत्न सिंह ने बताया कि वाराणसी, चंदौली, भदोही, मीरजापुर व सोनभद्र के सभी संबद्ध कालेजों के प्राचार्यों से औपचारिकता पूरी कर विश्वविद्यालय से उपाधियां ले जाने का सुझाव दिया गया है। कहा कि कालेजों द्वारा उपाधियां न ले जाने की स्थिति में संबद्ध कालेज के विद्यार्थियों को भी विश्वविद्यालय से ही उपाधियां दी जाएंगी। विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए वर्ष 2012 से 2020 तक (नौ साल) की डिग्री डिजी लॉकर में भी अपलोड करा दी गई हैं।
अब नैड (नेशनल एकाडमिक डिपाजिटर) पोर्टल से विश्वविद्यालय-महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपाधि डाउनलोड भी कर सकते हैं। सत्र 2021-22 से यूजी-पीजी के अंतिम खंड के छात्रों से 200 उपाधि शुल्क व 100 रुपये डाक सहित अन्य खर्च जमा कराया जा रहा है। दीक्षा समारोह के बाद सभी विद्यार्थियों को उनके स्थायी पते पर पंजीकृत डाक से उपाधियां भेज दी जाएंगी।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के निर्धन और जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्र कल्याण संकाय की ओर से आंशिक शुल्क मुक्ति व प्रतिपूर्ति दी जाएगी। साथ ही उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए मदद की जाएगी। कुलपति प्रो. एके त्यागी के निर्देश पर समिति का गठन किया गया है।
कमेटी में प्रो. अनुराग कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, अमिताभ कुमार सिंह, अभिषेक राय हैं। विश्वविद्यालय की ओर से शुरू हुई इस सुविधा का लाभ ऐसे विद्यार्थियों को मिलेगा जो अत्यंत निर्धन हैं और माता-पिता की आजीविका का साधन छिन गया हो। इसमें विभागाध्यक्ष और संकायाध्यक्ष की संस्तुति भी जरूरी