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देशभक्ति की प्रस्तुतियों से ऐसा बना रस कि झूमा जन गण मन

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वाराणसी। स्वाधीनता उत्सव का रंगारंग समापन गुरुवार को किया गया। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र की ओर से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। शुभारंभ मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने किया। दो दिवसीय आयोजन में काशी के दो सौ कलाकारों ने स्वाधीनता उत्सव में भागीदारी कर राष्ट्रप्रेम को प्रदर्शित किया।
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कार्यक्रमों का शुभारंभ रविदास गेट, कचहरी चौराहा व मैदागिन चौराहे पर देशभक्ति लोकगीतों से हुआ। गांधी अध्ययन पीठ में स्वाधीनता उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके उपरांत संगम कुमार ने शहनाई वादन में कजरी पेश की। आवर्तन संगीत संस्थान के विद्यार्थियों ने गायन की प्रस्तुति दी। निवेदिता शिक्षा सदन की छात्राओं ने कजरी और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में सुचरिता गुप्ता ने महात्मा गांधी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए की प्रस्तुति की। उन्होंने कजरी बीरन भैया अईले अनवईया सवनवा में ना जइबे ननदी...सुनाया।
वृष्टि चक्रवर्ती के निर्देशन में दुर्गा संस्कृति संस्थान की प्रशिक्षु कलाकारों ने देश वंदना पर सभी प्रांतों के लोकनृत्य पेश किए। इसके उपरांत नृत्यश्री एकेडमी के संजय गुप्ता के निर्देशन में राष्ट्रभक्ति पर आधारित समूह नृत्य किया। अंतिम प्रस्तुति चंचल गुप्ता एवं आशीष शर्मा के नृत्य की रही। स्वागत सांस्कृति केंद्र के प्रभारी डॉ. यशवंत राठौर ने किया। इस दौरान मुक्ता, यशभारती विष्णु यादव, प्रो. श्रद्धानंद, प्रो. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. सुजाता, अत्रि भारद्वाज, रोहित खन्ना मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रीतेश आचार्य, अतुल सिंह और अजय गुप्ता को सम्मानित किया गया।
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