गंगा-कावेरी के बीच अदृश्य संबंध है : कुलपति
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सदियों से तमिलनाडु के श्रद्धालु काशी आते रहे हैं और काशी के साधक दक्षिण भारत के महान मंदिरों की यात्रा करते रहे हैं। शैव और वैष्णव परंपराएं, मठ, पीठ, संत और विद्वान सभी ने गंगा और कावेरी के बीच एक अदृश्य संबंध स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम कोई नया संबंध नहीं रचता, बल्कि एक प्राचीन बंधन को नई पीढ़ी के लिए पुनर्जीवित करता है। धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो. जसमिंदर कौर ने किया। संवाद के बाद तमिल डेलीगेशन ने भारत कला भवन का भ्रमण किया। यहां उन्होंने पं. मदन मोहन मालवीय से संबंधित अनेक ऐतिहासिक दस्तावेजों और भारत रत्न सम्मान को देखा। इसके अलावा अटल इंक्यूबेशन सेंटर भी गए।
ऋषि अगस्त्य की यात्रा से निकली चिकित्सा पद्धति
आयुर्वेद संकाय में आयोजित विशेष व्याख्यान में कायचिकित्सा विभाग के प्रो. केएन मूर्ति ने कहा कि ऋषि अगस्त्य की उत्तर भारत से तमिलनाडु की दिशा में हुई पौराणिक यात्रा चिकित्सा पद्धतियों के सांस्कृतिक संबंधों का ऐतिहासिक आधार प्रस्तुत करती है। वहीं, डेलीगेशन के एक समूह ने दृश्य कला संकाय में आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया। जो हस्तशिल्प, सजावटी कलाओं, मूर्तिकला, काष्ठकार, वस्त्र, मिट्टी के शिल्प और अन्य परंपरागत कलात्मक विधाओं से जुड़े कारीगरों को समर्पित था। डॉ. राजीव मंडल और डॉ. सुरेश सी. जांगिड़ ने प्रतिनिधिमंडल को काशी की विविध कलात्मक परंपराओं से परिचित कराया।