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Varanasi News: सियासी चक्रव्यूह में फंसी काशी, समीकरणों पर टिकी निगाहें

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मतदाताओं की खामोशी ने बढ़ाई प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन, रिझाने को लगा रहे ऐड़ी चोटी का जोर
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। निकाय चुनाव की बिछी बिसात में देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी सियासी चक्रव्यूह में फंसी है। चुनाव प्रचार का शोर थमने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है। मगर, मतदाताओं की खामोशी ने प्रत्याशियों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। यही कारण है कि प्रत्याशी अपने मतदाताओं को रिझाने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। अपने समीकरणों के आधार पर राजनीतिक दल सियासी गुणा गणित भी तय कर रहे हैं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव की इस अग्निपरीक्षा से सियासी दल आगामी लोकसभा चुनाव की भी ताप मापना चाहते हैं।
सीमा विस्तार और परिसीमन के बाद 100 वार्ड वाले इस नगर निगम में 16 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इसमें ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, वैश्य, सिंधी, पंजाबी और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक साबित होगी। आंकड़ों की बात करें तो नगर निगम के मतदाताओं की कुल संख्या में एक चौथाई मुस्लिम मतदाता हैं। इन्हीं आकड़ों के आधार पर सियासी दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। भाजपा के खिलाफ माहौल बना रहे सपा और कांग्रेस की निगाह एकजुट मुस्लिम मतदाताओं पर टिकी है। सपा मुस्लिम, यादव और राजपूत मतों की आस में है और हिंदू मतों में सेंधमारी का प्रयास कर रही है। कांग्रेस भी मुस्लिम मतों के साथ कायस्थ और दूसरे हिंदू मतों को अपने पाले में करने का प्रयास कर रही है। जबकि भाजपा हर हाल में अपने हिंदू मतों को एकजुट कर उन्हें सहेजने में जुटी है। आम चुनाव-2024 से ठीक पहले हो रहे निकाय चुनाव में काशी पर पूरे देश की निगाह टिकी है।
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भाजपा के माथे पर बल डाल रहा विपक्ष
इस चुनाव में विपक्ष की मजबूत रणनीति और चुनावी कौशल ने भाजपा के माथे पर बल डाल दिया है। भाजपा ने इस बार निवर्तमान महापौर मृदुला जायसवाल का टिकट काटकर अशोक तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के सामने अपने मतों को सहेजने के साथ ही मत फीसदी बढ़ाने की चुनौती है। उधर, सपा ने नगर निगम में कई बार पार्षद रहे डाॅ. ओपी सिंह को प्रत्याशी बनाया है। एकजुट मुस्लिम मतों के साथ ही हिंदू मतों में सेंधमारी से यह भाजपा के सामने बड़ी चुनौती बने हैं। ऐसे ही कांग्रेस ने पांच बार विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा चुके अनिल श्रीवास्तव को मैदान में उतारा है। इसके जरिये कांग्रेस मुस्लिम मतों के साथ ही हिंदू और खासकर कायस्थ मतों पर भरोसा कर रही है। बसपा ने सुभाष चंद्र माझी, आप से शारदा टंडन, सुभासपा से आनंद तिवारी भी समीकरणों में उथल पुथल कर रहे हैं।


नए क्षेत्रों के जातीय समीकरण भी खड़ी कर रहे हैं मुश्किल
नगर निगम में वर्ष 2017 के चुनाव के बाद 87 गांवों का विलय किया गया और इसके बाद रामनगर नगर पालिका व सूजाबाद नगर पंचायत को भी नगर निगम में शामिल किया गया है। शहर के आसपास के 87 गावों के जातीय समीकरण भी सभी सियासी दलों के समीकरणों को मुश्किल में डाल रहे हैं।
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तीन मंत्रियों के साथ दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़ी
वाराणसी का चुनाव इस मायने में भी खास है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और काशी देश भर में विकास के मॉडल के रूप में पहचान बना चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रविंद्र जायसवाल, दया शंकर मिश्र दयालू की साख भी दांव पर लगी है। इसके साथ ही वाराणसी के कई दिग्गज नेता केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में वाराणसी के परिणाम पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

एक निगाह में नगर निगम का समीकरण
कुल मतदाताओं की संख्या 1611536
पुरुष मतदाताओं की संख्या- 863359
महिला मतदाताओं की संख्या- 748177

ऐसे समझें वाराणसी नगर निगम का जातीय समीकरण
मुस्लिम मतदाता- चार लाख
ब्राह्मण, भूमिहार- एक-एक लाख
जायसवाल, अग्रहरी- एक लाख
पटेल, कुशवाहा, मौर्या- सवा से डेढ़ लाख
राजपूत- 60 हजार
कायस्थ- 50 हजार
यादव- 50 हजार
सिंधी-पंजाबी- 30 हजार
बंगाली- 25 हजार
राजभर- 25 हजार
मल्लाह- 25 हजार
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