20 कलाकारों ने सुर, लय और ताल से की नादब्रह्म की उपासना
बनारस घराने की संगीत को सहेजने के लिए शुरू हुए काशी संगीत कला महोत्सव की अंतिम निशा में घराने के शीर्षस्थ 20 से अधिक कला साधकों ने सुर, लय और ताल से धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ में नादब्रह्म की उपासना की। स्व. पं. राजन मिश्र के पुत्र रितेश-रजनीश मिश्र की जोड़ी ने गहराती निशा को जागृत कर दिया। दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल के मंच पर एस तेजस्वी शशांक ने सांकेतिक निशा की शुरू से शुरुआत की।
उन्होंने राग यमन कल्याण में द्रुत एक ताल की बंदिश के बाद चैती गाया। दूसरी प्रस्तुति लखनऊ के पं. रविनाथ मिश्र एवं आराध्य मिश्र के तबला वादन की रही। उन्होंने सोलह मात्राओं की बंदिश तीन ताल में सुनाई। उसके बाद बनारस घराने के पारंपरिक उठान, कायदा, आड़ी लय, बराबर लय, टुकड़ा, रेला, जातफर्द सुनाकर समापन किया। तीसरी प्रस्तुति में विदुषी सुचरिता गुप्ता ने राग मिश्र तलंग में ठुमरी के बाद दादरा सुनाया, बोल थे- चित ले गयो मोरे सवारियां।
चौथी प्रस्तुति नई दिल्ली के बांसुरी वादक पं. राजेंद्र प्रसन्ना की रही। उन्होंने विभिन्न रोग पर बंदिशें को बांसुरी की सुरीली धुनों में पिरोकर सभी को मदमस्त कर दिया। तबले पर ललित कुमार एवं सह बांसुरी पर राकेश कुमार रहे। दिल्ली से आए रितेश-रजनीश मिश्र ने मंच संभाला तो सुधि श्रोता भी दम साधे रहे।
उन्होंने सबसे पहले राग जोग कौंश में विलंबित एक ताल में बंदिश सुनाई। अंत में उन्होंने अपने पिता की स्मृति में उनका एक प्रख्यात भजन भी सुनाया। इस मौके पर पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू, पं. कमेश्वनाथ मिश्र, पं. पूरण महाराज आदि रहे। संयोजक धर्मसंघ महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने कलाकारों का सम्मान किया। संचालन अंजना झा व अरविंद मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन पं. देवब्रत मिश्र ने दिया।