शिव की नगरी काशी उत्तर और दक्षिण के महामिलन से बम-बम हो गई। शैव अधीनम ने अपने आराध्य आदिविश्वेश्वर के दरबार में हाजिरी लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरु बनाने की कामना की। स्वागत और काशी विश्वनाथ धाम की भव्यता से अभिभूत शैव अधीनम ने काशी-तमिल संगमम को उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला रामसेतु बताया।
शुक्रवार को तमिलनाडु की नौ प्रमुख पीठों के शैव अधीनम काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। शैव मठाधीशों के आगमन पर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर डमरुओं की डिम-डिम संग हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शैव मठाधीशों का स्वागत कर कहा कि नव्य-भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में आप सबका स्वागत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा पर काशी और तमिल के बीच सदियों पुराने रिश्ते को पुनर्जीवित किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से कवि सुब्रमण्यम भारती को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी। मंदिर पहुंचने वालों में धरूमापुरम, सुरियानार, वेलंकुरिची, सेनकोल, बोम्मापुरम, थुलावुर, कामाक्षीपुरी, डिंडीगुल शिवापुरम एवं पल्लादम सेनजेरी के शैव मठाधीश शामिल थे।
पुण्य योग के कारण मिला काशी आने का अवसर
स्वागत से गदगद धर्मगुरु बाबा काशी विश्वनाथ के दिव्य ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर अभिभूत हो उठे। कॉरिडोर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम के पुण्य योग के कारण ही काशी नगरी आने का अवसर प्राप्त हुआ। मां गंगा के तट पर बसी भगवान शंकर की यह नगरी अद्भुत है। इसे जितना समझिए, जितना जानिए, उतनी ही उत्सुकता बढ़ जाती है। धर्मपुरम शैव मठाधीश के गुरु ने कहा कि छठवीं शताब्दी में उनके मठ के प्रतिनिधि काशी आए थे।
एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
बाबतपुर। काशी तमिल संगमम से शामिल होने नौ अधीनम (महंत) शुक्रवार को काशी पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत हुआ। भाजपा नेता शैलेश पांडेय ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम देकर उनका अभिनंदन किया।