कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को तकलीफ में नहीं देख सकते, ऐसे में अगर बेटा और बेटी दोनों ही दिव्यांग हो तो माता-पिता की तकलीफ भी कई गुना बढ़ जाती है। यह हकीकत है वाराणसी के गुरुबाग निवासी रोहित और अंशुमा रस्तोगी के बच्चों की। ये दोनों बच्चे रोली व अक्षत रस्तोगी बचपन से ही व्हीलचेयर पर हैं।
ये बच्चे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से ग्रसित हैं। इसमें पूरे शरीर में उर्जा संचित न होने की वजह से मांसपेशियां काफी कमजोर हो जाती हैं। जिसकी वजह से रोली और अक्षत चलने-फिरने में असमर्थ हैं। अपने और अपने छोटे भाई की बीमारी के इलाज के लिए रोली ने सांसद व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।
बीएचयू, पीजीआई व हिंदुजा में भी करा चुके हैं इलाज
1997 से लेकर अब तक रोली के माता-पिता बच्चों के इलाज के लिए कई बड़े अस्पताल के चक्कर लगा चुके हैं। इसमें बीएचयू, पीजीआई, जन विकलांग केंद्र, नारायण सेवा संस्थान उदयपुर, आरोग्यधाम चित्रकूट, हिंदुजा अस्पताल मुंबई शामिल है।
एसपीजीआई लखनऊ की डॉक्टर सुभा फड़के ने इलाज के दौरान बताया कि अमेरिका में बनने वाली दवा स्पिनराज एवं रिस्डिप्लाम इस बीमारी के लिए काफी हद तक कारगर है। लेकिन अत्यंत महंगी होने के कारण रोली का परिवार इस खर्च को उठाने में असमर्थ है। साल 2019 में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के वाराणसी आगमन पर रोली के परिवार ने इस संबंध में प्रार्थना पत्र भी सौंपा था।