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पटाखों से काशी की हर सांस ‘खतरे’ में

Sun, 06 Nov 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
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शाहजहांपुर में वायु प्रदूषण का हाल
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दिवाली के अगले दिन शहर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर था। उस दिन आबोहवा छह गुना तक विषैली हो गई थी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने त्योहार के छह दिन बाद शनिवार को यह रिपोर्ट जारी की है। वैसे भी प्रदूषण के मामले में काशी बदनाम है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की साइट के मुताबिक दिवाली के पांच दिन बाद भी प्रदूषण का स्तर पीएम (2.5) 246 और पीएम (10) 189 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिला। यह 100 माइक्रो प्रतिघन मीटर के खतरे के स्तर से से लगभग दोगुना है।
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आरडीएस के जरिए मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मुताबिक 31 अक्तूबर को शहर में वायु प्रदूषण पीएम (10) 491.97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। बता दें कि सौ पीएम को सामान्य कहा जाता है। जानकारों की मानें तो रोजाना के प्रदूषण के कारण अभी तक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदेश शासन को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पटाखों की वजह से इतना प्रदूषण हुआ।

 इससे पहले दो नवंबर को केयर फॉर एयर संस्था ने रिपोर्ट जारी कर दावा किया था कि दिवाली के अगले दिन  (30-31 अक्तूबर) सोनारपुरा में वायु प्रदूषण 687.9 पीएम 10 था। दूसरी तरफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी घनश्याम के मुताबिक जवाहर नगर, सोनारपुरा के आसपास के इलाकों में यह 491.97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।
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मंडलीय अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरके शर्मा का कहना है निर्धारित मानक से अधिक प्रदूषण होने पर अस्थमा का अटैक, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में आक्सीजन की कमी, बेचैनी आना, नींद पूरी न लगना आदि परेशानी होती है। पटाखा जलने के बाद उससे निकलने वाली कार्बन मोनोआक्साइड आदि गैसें ओस में घुल जाती है। सुबह टहलने वाले लोग इससे प्रभावित होते हैं।
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