बाबा विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मसजिद में प्रवेश के लिए बनी एकता द्वार की योजना जल्दी ही साकार हो सकती है। जिला प्रशासन ने क्तों और नमाजियों के प्रवेश के लिए छत्ता द्वार को कौमी एकता की मिसाल के तौर पर एकता द्वार के रूप में बनवाने की योजना पहले से बनाई है। कुछ दिन पहले इस पर ज्ञानवापी अंजुमन इंतजामिया मसजिद ने कड़ा एतराज जताया था लेकिन अब कौमी एकजहती की मिसाल कायम करने की तैयारी शुरू हो गई है।
हाल में ही हुई बारिश के दौरान जर्जर दीवार का हिस्सा गिरने पर जिला प्रशासन ने तीन दिन पहले छत्ता द्वार को तुड़वा दिया। कहा जा रहा है कि ज्ञानवापी अंजुमन इंतजामिया मसजिद के पदाधिकारियों की सहमति के बाद छत्ता द्वार के जर्जर हिस्से को प्रशासन ने तुड़वाया है। मलवा हटाने के लिए छत्ता द्वार से भक्तों और नमाजियों का प्रवेश भी बंद कर दिया गया है। चूंकि छत्ता द्वार मंदिर और मसजिद में प्रवेश का मुख्य मार्ग है, इसलिए उसके नए सिरे से निर्माण को लेकर हर किसी की निगाहें लग गई हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक एसएन त्रिपाठी ने छत्ता द्वार पर किसी तरह के निर्माण की मंदिर प्रशासन की योजना से इनकार किया है। उनका कहना है कि एकता द्वार की योजना जिला प्रशासन की है। उधर, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन का कहना है कि छत्ता द्वार के नए सिरे से निर्माण के मद्देनजर काशी में कौमी एकता और आपसी सौहार्द की अब तक की सबसे बड़ी मिसाल पेश की जाएगी। छत्ता द्वार को लेकर भक्त और नमानी दोनों कष्ट उठा रहे थे। अब इसे दूर करना है। छत्ता द्वार के नए सिरे से निर्माण के मामले में जिला प्रशासन से उनकी वार्ता हो चुकी है। जल्दी ही वह उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे।
छत्ता द्वार उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। इसका रकबा वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में 100 नंबर पर दर्ज है। वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना वहां कोई निर्माण नहीं कराया जा सकता। इसका नक्शा भी वक्फ बोर्ड ही पारित करेगा।