पीएम मोदी के साथ 12 दिसंबर को काशी आ रहे जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे चार घंटे के अपने प्रवास के दौरान यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों से रूबरू होंगे।
यहां आगमन के दौरान खास उनके लिए भगवान बुद्ध, संत कबीर, रैदास और गोस्वामी तुलसी दास सरीखे संतों के जीवन दर्शन पर आधारित गैलरी लगाई जाएगी। दुनिया भर में मोक्ष नगरी के रूप में ख्यात काशी के महाश्मशानों पर 24 घंटे शवदाह और राजा हरिश्चंद्र की त्याग-समर्पण की दास्तां भी वो जानेंगे।
पर्यटन उद्योग के लिए एक बड़ी संभावना के रूप में देखे जा रहे जापानी पीएम के इस दौरे में खास तौर से यह सामने लाने का प्रयास होगा कि बीते पांच हजार सालों से आखिरकार काशी धर्म, संस्कृति और कला का केंद्र क्यों रही है। इसके लिए होटल गेटवे के नदेसर पैलेस में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यहां रात्रिभोज के दौरान पीएम मोदी की मौजूदगी में उनके जापानी समकक्ष शिंजो अबे को श्रीमद्भागवत गीता भी भेंट की जाएगी।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की प्रस्तावित यात्रा को दुनिया के पर्यटन मानचित्र में काशी के नए उभार के तौर पर देखा जा रहा है। कभी सारनाथ से होकर चीन के रास्ते जापान में पुष्पित, पल्लवित और संवर्धित हुए बौद्ध धर्म के फिलहाल वहां लाखों अनुयायी हैं।
जापानी पीएम शिंजो अबे शिंतो धर्म के अनुयायी हैं, जिसका आधार काफी हद तक बौद्ध धर्म है। नई दिल्ली से आए विशेष सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जापानी पीएम काशी में भगवान बुद्ध के साथ ही संत कबीरदास, रैदास और तुलसीदास का जीवन दर्शन जानना चाहते हैं।
साथ ही, यह भी कि काशी में साल के बारहों महीने और चौबीसों घंटे कैसे शवदाह का सिलसिला अनवरत जारी रहता है। काशी के प्रति जापानी पीएम की उत्सुकता को देखते हुए नदेसर पैलेस में भगवान बुद्ध, संत कबीरदास, रैदास, तुलसीदास के साथ ही काशी की विशिष्टता से जुड़ी बातों को गैलरी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। रात्रि भोज के दौरान यहां की महान विभूतियों की कृतियों के प्रमुख अंश सुनाने की भी व्यवस्था होगी। नदेसर पैलेस में इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।