बेटों को भेजेंगे सेना में
सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2010 में अपने गांव का प्रधान चुना गया। घर पर पत्नी मनोरमा देवी और तीन पुत्र हैं। दूसरे और तीसरे नंबर के बेटे को सेना में भेजने के लिए तैयारी करा रहे हैं। साथ ही गांव और आसपास के बच्चों को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। किस तरह से तैयारी की जाए, इसके बारे में भी युवाओं को बताते और समझाते हैं। सरकार और प्रशासन से कोई शिकायत नहीं है। सेना में हमने अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत करना सीखा है। सेना से मिली सीख के सहारे आज भी जीवन जी रहे हैं।
संजय की शहादत पर गर्व है
गाजीपुर के मूल निवासी कुमाऊं रेजिमेंट के वीर जवान संजय यादव कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। संजय का परिवार सारनाथ क्षेत्र की अनमोल नगर कॉलोनी में रहता है। परिजनों के अनुसार, संजय 1995 में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए थे।
कारगिल युद्ध के दौरान उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। एक दिन रेजिमेंट से अचानक फोन आया कि संजय शहीद हो गए हैं तो पूरे परिवार को समझ में ही नहीं आया कि यह क्या हो गया। संजय की याद तो हमेशा आती है, लेकिन उनके अदम्य साहस, वीरता और शहादत पर गर्व होता है।