शिविरों में तिल रखने की जगह नहीं, हर तरफ बोल बम
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काशी से प्रयाग के बीच तीसरे सावन की पूर्व संध्या पर रविवार को एक तरफ सावन बरसा तो दूसरी ओर आस्था की झमाझम बारिश हुई। नंगे पैर पथरीली सड़कों पर कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ा।
हर तरफ बोल बम और हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंजे तो शिविरों में सेवा के तरह-तरह के रंग छाए रहे। रात को जोरदार बारिश के बावजूद शिव भक्तों की छत्तादवार से लंबी कतार लग गई। जयकारे गूंजने लगे। दिन भर रेला उमड़ता रहा। कतारबद्ध कांवरिये बाबा के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ते रहे।
ट्रालियों, टेंपो, ट्रैक्टरों पर सजी बाबा विश्वनाथ की मोहक झांकियों को लेकर कांवरियों की टोलियां दिन भर काशी की सड़कों पर चलती नजर आईं। कंधे पर रंग-बिरंगी कांवर लिए समूह बोल कंवरिया बोल बम... के जयकारे लगाते हुए हर तरफ बढ़ते नजर आए।
रविवार की दोपहर बाद भीड़ का दबाव बढ़ गया। दशाश्वमेध घाट पर भी कांवरियों से हर कोना केसरिया नजर आने लगा था। महिलाएं, बच्चे भी कांवर लेकर बाबा के धाम पहुंचे। कहीं भजनों की गूंज तो कहीं सेवा के भंडार खुले रहे।
चितरंजन पार्क के शिव शक्ति कांवरिया तीर्थयात्री सेवा शिविर तक कांवरियों का रेला इस कदर था कि पैदल भी लोग नहीं चल पा रहे थे। शिविर में कांवर रखने की जगह नहीं बची थी। इसी तरह लक्सा स्थित सिंधी धर्मशाला के काशी विश्वनाथ कांवरिया सेवा शिविर में भी हजारों भक्तों ने पड़ाव डाल दिया।
इस शिविर के भंडारी प्रभाकर यादव ने बताया कि कांवरियों की भीड़ की वजह से छतों पर भी थालियां परोसी जा रही हैं। शिविर के संचालक गोपाल सिंह के नेतृत्व में हजारों कांवरियों को कढ़ी-चावल का भोग परोसा गया।