कार्यक्रम में शामिल लोग
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उनका कहना था कि जब मनुष्य में पवित्रता, सात्विकता और सादगी आएगी, तभी सद्गुरु उसकी सुनेंगे।आचार्य जी ने कहा कि उनके द्वारा प्रज्वलित की गई ज्योति के प्रवाह को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। यह त्याग और गुरु के पदचिह्नों पर चलकर ही संभव है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब की जन्मस्थली प्राकट्य धाम को हजूर उदित नाम साहेब ने कबीरपंथियों को धरोहर के रूप में सौंपकर कबीर पंथ को गौरवान्वित किया है। वे एक महान महापुरुष थे।
धर्माधिकारी ने हजूर उदित नाम साहेब के जीवन को सरल एवं अनुकरणीय बताया। इस अवसर पर पटना के महंत मनभंग दास, दार्जिलिंग के सर्वानंद दास, नोएडा के हंसयोग दास, झांसी के पुष्कर दास, जोधपुर के हरिराम, दिल्ली के लालचंद सहित अन्य संतों ने भी अपने विचार रखे।शाम को चौका पूजन एवं आरती संपन्न हुई।
संगत ने भजन-कीर्तन और कबीरवाणी का गान किया। इस अवसर पर कालूराम, सुरेश, गणेश कुशाल, देवेंद्र, ओम प्रकाश, अनिल परिहार, हितेश परिहार, पुनीत सांखला आदि उपस्थित रहे। रामनिवास और हरिराम सहित अन्य भक्तों के सहयोग से आयोजित भंडारे में अनुयायियों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंदों को कंबल भी वितरित किए गए।