इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी की षोडषोपचार विधि से पूजा की गई। ज्येष्ठा गौरी का पंचामृत व श्रीसूक्त से अभिषेक किया गया। ज्येष्ठा गौरी का सोलह प्रकार की मालाओं से शृंगार किया गया। अंत में ज्येष्ठे, श्रेष्ठे, तपोनिष्ठे, धर्मीष्ठे, सत्यवाहिनी, समुद्रवसने देवी, ज्येष्ठा गौरी नमोस्तुते... मंत्र के ज्येष्ठा गौरी को विशेष अर्घ्य दिया गया।
परिवार के सभी लोगों ने विशेष कर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य के साथ सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। ट्रस्टी ने बताया कि ज्येष्ठा गौरी को केले के पत्ते पर भोग लगाया गया। बताया कि इस दिन अरवी के पत्ते से बनी पकौड़ी का विशेष महत्व है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष नवमी को मूल नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी की पंचोपचार पूजन कर विदाई की जाएगी।