काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 17 से 24 दिसंबर के बीच आयोजित राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में लोक संस्कृति, कला और साहित्य का संगम होगा। आठ दिवसीय इस महोत्सव में देश भर के करीब दो हजार कलाकार जुटेंगे। गायन, नृत्य, शास्त्रीय संगीत समेत नाटक, लोक कला से जुड़े विविध कार्यक्रम इस महोत्सव को खास बनाएंगे। यही नहीं बिरहा, दंगल, कठपुतली जैसे आयोजन भी होंगे। इस महोत्सव में लोग न सिर्फ देश भर की संस्कृतियों से बल्कि खानपान के जायके से भी रूबरू होंगे।
शनिवार को बीएचयू एलडी गेस्ट हाउस में कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में महोत्सव के आयोजित समितियों के संयोजकों व संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। कुलपति ने कहा कि दिल्ली के बाद ये तीसरा राष्ट्रीय महोत्सव पहली बार बनारस में होने जा रहा है और बीएचयू इसकी मेजबानी कर रहा है। यही नहीं इस पूरे आठ दिन के आयोजन में विश्वविद्यालय के हर संकाय और हर विभाग की भागीदारी होगी।
संगीत एवं मंच कला संकाय में गायन, वादन, नृत्य व शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम होंगे। नाटक का मंचन स्वतंत्रता भवन में होगा। कई सामाजिक मुद्दों पर नुक्कड़ नाटक भी होंगे। महोत्सव में रामायण और महाभारत पर आधारित भारतीय संस्कृति सभ्यता प्रदर्शनी खास होगी। चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी की ओर से बाल फिल्में दिखाई जाएंगी। छात्र-छात्राओं के लिए गांधी स्मृति दर्शन कार्यशाला होगी। एंफीथिएटर ग्राउंड में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा होगा। दिव्यांगों के लिए भी विशेष कार्यक्रम होंगे। महोत्सव के तहत मेला भी आयोजित होगा जिसमें 105 स्टाल लगाए जाएंगे। महोत्सव में आकर्षक बर्तन बनाने वाले ठठेरों, योग क्रिया व मलखंभ को भी शामिल किया गया है। बैठक में कल्चरल सेंटर इलाहाबाद के गौरव कृष्ण बंसल, डॉ. आरएस गिर, डॉ. पीयूष कुमार, असम की कलाकार शारदीय, ललित कला अकादमी के सीएस कृष्णा शेट्टी, संगीत नाटक अकादमी के सुमन कुमार, संस्कार भारती के अमीर चंद्र मौजूद रहे।