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जुल्म और आतंकवाद का विरोध करना इंसानियत की पहचान

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वाराणसी। बरोज जुमेरात पर शहर भर में मजलिसों का आयोजन किया गया। गुरुवार को दरगाहे फातमान, सदर इमामबाड़ा, अर्दली बाजार, चौहट्टा लाल खां में अलम उठाया गया। नौहा मातम के साथ लोगों ने नम आंखाें के साथ जियारत की।
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दरगाहे फातमान में नौचंदी जुमेरात पर अलम उठाया गया। इस दौरान विभिन्न रौजों पर नौहाखानी के बाद हजरत अब्बास के रौजे पर तकरीर की गई। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने कहा कि 14 सौ साल पहले इमाम हुसैन ने आतंकवाद के विरोध में कुरबानी पेश की और जुल्म का विरोध करते हुए सारी दुनिया को यह पैगाम दिया कि जुल्म कहीं भी हो आवाज बुलंद करनी चाहिए। बड़ी तादाद में लोगों ने नौहा मातम के साथ देश की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी। दरगाह के मुतव्वली अब्बास रिजवी राफक ने अजादारों का इस्तकबाल किया। इस दौरान अर्दली बाजार नाजिम अकबर के इमामबाड़े पर कच्ची सराय शाहिद अली के इमामबाड़े पर, मदनपुरा मस्जिद अशनाअसरी, इमानिया कालेज मुकीमगंज, दोषीपुरा आदि क्षेत्रों में मजलिसों का आयोजन किया गया। दरगाहे फातमान में दस दिवसीय मजलिस के तीसरे दिन मातमी अंजुमन जव्वादिया के संयोजन में मौलाना फजले मुमताज जौनपुर ने मजलिस को खिताब किया। मुकीमगंज में मौलाना बाकर हुसैन, कच्चीसराय में मोहतसिम ने मजलिसों को खिताब किया। शुक्रवार की शाम को छह बजे कैसर मंजिल पितरकुंडा में फरहा नाज के संयोजन में ख्वातिन की मजलिस होगी। सकीना का ताबूत अली असगर का झूला उठाया जाएगा।
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