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Varanasi News: जेएनयू के प्रो. ठाकुर बोले- आदिवासी परंपराओं को अस्वीकार नहीं कर सकते

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बीएचयू के संबोधि सभागार में जेएनयू के पॉलिटिकल साइंस के प्रो. मणिंद्र नाथ ठाकुर ने कहा कि ब्राह्मणवादी ज्ञान परंपरा को अस्वीकार कर सकते हैं, लेकिन आदिवासी परंपराओं को नहीं। पश्चिमी ज्ञान आज भी भारतीय सोच पर हावी है और हमें अपनी स्वदेशी बौद्धिक परंपराओं के अध्ययन से ज्ञान को स्वतंत्र करना चाहिए। राजनीति विज्ञान विभाग की दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला में प्रो. ठाकुर ने बताया कि भारतीय विश्वविद्यालयों में अब भी उपनिवेशकालीन ज्ञान प्रणाली का प्रभाव है, जिससे देश की पारंपरिक ज्ञान परंपराएं पीछे छूट गईं हैं। अब समय है कि हम अपनी इन परंपराओं को फिर से अपनाएं। हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो. अरुण पटनायक ने ग्राम्शी के विचारों को सरल रूप में समझाया और कहा कि सिद्धांत को आम लोगों के अनुभवों से जुड़ना चाहिए। इन लोगों के साथ संवाद से नए सिद्धांत बन सकते हैं। इस कार्यक्रम में 150 से ज्यादा छात्र-छात्राएं और शोधार्थी मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. अमरनाथ मोहंती ने संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की और डॉ. अभिषेक नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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