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काशी में जीवांजलि: आध्यात्मिक वक्ता जया बोलीं- बच्चों को गलती करने का माैका देना होगा ताकि वे संभलना सीखें

Sun, 20 Sep 2026 06:15 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

जीवांजलि कार्यक्रम में जया किशोरी ने बच्चों की परवरिश को लेकर कहा कि उन्हें दबाकर नहीं, समझदार बनाकर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सख्ती बढ़ाने पर बच्चे झूठ बोलने लगते हैं। बच्चों को नीचा दिखाकर सीख देने के बजाय समझदार कहकर जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मां-बाप का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन बच्चों की उन्नति का उद्देश्य गलत नहीं होता। शास्त्र जीवन जीने की पद्धति सिखाते हैं।
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जीवांजलि कार्यक्रम को संबोधित करतीं जया किशोरी। - फोटो : संवाद
बदलती पीढ़ियों के बीच बढ़ते संवादहीनता के फासले को पाटने के लिए बच्चों को दबाने या हर कदम पर रोकने के बजाय उन पर भरोसा करना होगा। बच्चों को गलती करने का अवसर देना होगा, ताकि माता-पिता के रहते वे गिरकर संभलना सीख सकें। प्रसिद्ध कथावाचक एवं आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी ने शनिवार को अमर उजाला और हरे कृष्ण ज्वेलर्स के संयुक्त तत्वावधान में चौकाघाट स्थित गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल में आयोजित जीवांजलि कार्यक्रम में बदलते पारिवारिक रिश्तों, बच्चों की परवरिश, संस्कार, मोबाइल और भारतीय परंपराओं पर बात करते हुए यह बात कही।
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कार्यक्रम में जया किशोरी का स्वागत करते हुए। - फोटो : संवाद
जया किशोरी ने कहा कि आज घर में दो पीढ़ियां हैं, माता-पिता और बच्चे। दोनों को लगता है कि उनकी पीढ़ी बेहतर समझती है। माता-पिता को लगता है कि बच्चों को उनके अनुभव की जानकारी नहीं है और बच्चों को लगता है कि उनके जमाने से बेहतर कोई जमाना नहीं। ऐसे में दोनों बात करने बैठते हैं तो कई बार बातचीत समाधान के बजाय विवाद पर खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच हो या भाई-बहन के बीच, कोई भी दूरी तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक दोनों तरफ से उसे खत्म करने की इच्छा न हो।
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जीवांजलि कार्यक्रम में स्वागत करते हुए। - फोटो : संवाद
जया किशोरी ने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके माता-पिता जब उन्हें कोई बात समझाते थे तो यह नहीं कहते थे कि यही करो। वे स्थिति बताते और कहते, तुम समझदार हो, बाकी तुम बताओ क्या ठीक रहेगा। समझदार कहकर वे खुश कर देते थे और फिर जो निर्णय वे बताते, मैं वही करती थी। 

उन्होंने कहा कि बच्चों पर हर बात के लिए दबाव बनाकर उन्हें सही नहीं बनाया जा सकता। जब माता-पिता अपने बच्चों को अपने सामने गलती करने देते हैं तो उनके पास गिरने पर उठाने का अवसर भी रहता है। यही अनुभव आगे चलकर बच्चों को सही निर्णय लेने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे आने वाला समाज और देश हैं। इसलिए उनकी परवरिश केवल एक परिवार का नहीं, पूरे समाज के भविष्य का विषय है।

सख्ती बढ़ेगी तो झूठ बढ़ेगा
उन्होंने कहा कि माता-पिता को यह समझना होगा कि गलतियां सिर्फ बच्चे नहीं करते, उनसे भी गलतियां हुई हैं। अपना समय भूलकर बच्चों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे हर बात उसी तरह समझें, जैसे माता-पिता समझते हैं। उन्होंने चेताया कि बच्चों के प्रति जितनी अधिक सख्ती बढ़ती जाएगी, वे उतने ही अधिक झूठ बोलने लगेंगे। सीख देते समय बच्चे को नीचा दिखाना जरूरी नहीं है। सीख दीजिए, लेकिन उसकी इज्जत बचाकर। सम्मान हर व्यक्ति को अच्छा लगता है। 

उन्होंने कहा कि माता-पिता के तरीके गलत हो सकते हैं, लेकिन उनके उद्देश्य गलत नहीं होते। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे अधिक सुख और बेहतर जीवन पाएं। मां-बाप से अधिक बच्चे की उन्नति चाहने वाला शायद ही कोई हो। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने जितना बेहतर सीखा, अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों को उससे बेहतर देने की कोशिश की, लेकिन हर चीज माता-पिता नहीं कर सकते, कुछ जिम्मेदारी बच्चों को भी उठानी होगी।

जिस गड्ढे में हम गिर चुके, उसमें मत गिरना
उन्होंने नई पीढ़ी को लेकर कहा कि बच्चों को लगता है कि वे नई सोच लेकर आए हैं, इसलिए उनकी हर बात सही होगी। लेकिन यह भी एक प्रयोग है। माता-पिता जीवन में अच्छा-बुरा दोनों देख चुके हैं। इसलिए जब वे बच्चों को किसी रास्ते पर जाने से रोकते हैं तो कई बार उनका आशय सिर्फ इतना होता है कि जिस गड्ढे में वे खुद गिर चुके हैं, उसमें बच्चे न गिरें।
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जया किशोरी ने किया सम्मानित। - फोटो : संवाद
संस्कार बचपन में, जब मिट्टी गीली हो
जया किशोरी ने कहा कि संस्कार देने का सही समय बचपन है। जब मिट्टी गीली होती है, तभी उसे मनचाहा आकार दिया जा सकता है। बड़े होने के बाद डर के माहौल में दिए गए संस्कार उतने स्थायी नहीं होते। बच्चे पर निगरानी इसलिए नहीं होनी चाहिए कि वह केवल माता-पिता की मौजूदगी में सही व्यवहार करे, बल्कि उसे ऐसा बनाया जाना चाहिए कि माता-पिता के सामने न होने पर भी वह सही निर्णय ले सके। बच्चों को किताबों से जोड़ने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि एक किताब पढ़कर व्यक्ति किसी दूसरे के 20 साल के अनुभव को समझ सकता है। उन्होंने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें शास्त्रों की बातें कहानी के रूप में समझाईं।

मोबाइल दे रहे माता-पिता, फिर मासूमियत खोने की शिकायत
उन्होंने मोबाइल को लेकर भी माता-पिता को आईना दिखाया। कहा कि आज बच्चे उम्र से पहले समझदार हो रहे हैं और इसके लिए केवल बच्चों को दोष देना ठीक नहीं है। फोन माता-पिता ही बच्चों के हाथ में दे रहे हैं, क्योंकि वे खुद अपने दोस्तों के साथ बैठे होते हैं। फोन ने बच्चों के भीतर की मासूमियत को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही किताब, कथा, परिवार और अपनी परंपराओं से जोड़ना होगा। बच्चों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि क्या करना है, बल्कि यह भी बताना होगा कि उसके पीछे की वजह क्या है।
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सम्मान पाकर खिल उठे चेहरे। - फोटो : संवाद
त्योहार पार्टी नहीं, परंपरा और संस्कार भी हैं
उन्होंने कहा कि कुछ माता-पिता शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि हमने उन्हें अपनी परंपराओं के बारे में कितना बताया, त्योहारों को भी हमने कई बार केवल पार्टी बना दिया है। दिवाली का अर्थ सिर्फ नए कपड़े पहनना और पटाखे छुड़ाना नहीं है। भारतीय परंपरा में त्योहारों, रीति-रिवाजों और संस्कारों में बहुत गहराई है, लेकिन नई पीढ़ी को उसके बारे में ठीक से बताया ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि धर्म बदलाव का विरोध नहीं करता। बदलाव प्रकृति का नियम है और भगवान के अवतारों की कथाओं में भी यही सीख मिलती है। श्रीराम मर्यादा में रहना सिखाते हैं तो श्रीकृष्ण बताते हैं कि मर्यादा की रक्षा कैसे करनी है।

आज का युद्ध बाहर नहीं, दिमाग के अंदर
जया किशोरी ने मौजूद लोगों से संवाद करते हुए उनके सवालों के जवाब दिए। कहा कि किसी चीज को प्राप्त करने का माध्यम धर्मसम्मत होना जरूरी है। जिस देश में संविधान है, वहां नियमों के तहत चलना होगा। मूल्य शास्त्र से लिए जा सकते हैं और व्यवस्था संविधान से चलानी होगी। एक सवाल के जवाब में कहा कि आज का युद्ध बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के दिमाग के अंदर चल रहा है। हर तरफ तनाव है। 

आध्यात्मिक होने का अर्थ कपड़े बदलना नहीं, बल्कि भीतर से बदलना है। ईश्वर के करीब होने का अर्थ जीवन की हर परिस्थिति में भीतर से मजबूत होना है। उन्होंने कहा कि शास्त्र केवल पूजा-पाठ नहीं सिखाते, बल्कि जीवन जीने की पद्धति बताते हैं। ऐसी पद्धति, जो व्यक्ति को परिस्थितियां बदलने पर भी अडिग खड़ा रहना सिखाए। कार्यक्रम के अंत में जया किशोरी ने लोगों की मांग पर भजन 'किशोरी कुछ ऐसा काम हो जाए...' प्रस्तुत किया।
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दंपती को मिला सम्मान। - फोटो : संवाद
महिलाओं को आगे रखने में भी स्वार्थ ही रख लो
उन्होंने परिवार में महिलाओं की भूमिका पर भी बात की। कहा कि राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर और सीताराम जैसे संबोधनों में महिलाओं को आगे रखा गया है। बहू, पत्नी और बेटी को लक्ष्मी कहा जाता है। आज के अर्थ में लक्ष्मी का अर्थ रुपया है। मेरी बात मानिए, आप अपने घर की लक्ष्मी को खुश रखिए, लक्ष्मी घर में खुद आ जाएगी। मजाकिया लहजे में कहा कि मैं तो कहती हूं कि इसी स्वार्थ में महिलाओं का सम्मान कर लो, उन्हें आगे रख लोगे तो घर में लक्ष्मी आ जाएगी।

मेहनत करते समय बहरे हो जाइए
जया किशोरी ने लक्ष्य पर फोकस कैसे करें, इस तरह के कई सवालों पर एक कहानी सुनाई। कहा कि एक बंदर पहाड़ी चढ़ रहा था तो नीचे से कई बंदर चिल्ला रहे थे कि मत चढ़, गिर जाएगा। उतर आओ। वह बंदर बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था, लेकिन चढ़ता जा रहा था। अंत में वह सफलतापूर्वक चढ़ गया तो जो मना कर रहे थे, उन्होंने ही तालियां बजाईं। बाद में लोगों को पता चला कि वह बंदर तो बहरा था, नीचे से जो लोग उसे मना कर रहे थे, वह सुन ही नहीं पा रहा था। इसीलिए मेहनत करते समय बस चढ़ते जाइए और लोग क्या कह रहे हैं, उस पर ध्यान मत दीजिए, बहरे हो जाइए।

इन्होंने किया स्वागत : सिल्क मार्क वाराणसी की ओर से जया किशोरी का स्वागत डॉ. देवाशीष चट्टोपध्याय ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर किया।

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दीप प्रज्जवलन से शुभारंभ। - फोटो : संवाद
कार्यक्रम के सहयोगी
  • प्रजेंटिंग पार्टनर : हरे कृष्णा ज्वैलर्स
  • पावर्ड बाई पार्टनर : शाकुंतलम इंफ्रा डेवलपर्स
  • सिल्क प्यूरिटी पार्टनर : सिल्क मार्क इंडिया
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जीवांजलि कार्यक्रम में माैजूद लोग। - फोटो : संवाद
कार्यक्रम के सहयोगी
  • शिव ज्वैलर्स मऊ निखिल वर्मा प्रोपराइटर
  • मयांग स्किन केयर सेंटर बलिया, डॉ. अनिल सोनी संग पूजा सोनी
  • न्यू आदित्य मेटरनिटी और नर्सिंग होम चंदौली, डॉ विजय लक्ष्मी पांडे
  • श्री साई ट्रांसमिशन कंस्ट्रक्शन चंदौली, निरंजन सिंह संग पत्नी गुंजा सिंह
  • डॉ. अविनाश कुमार मिश्रा एसोसिएट प्रोफेसर एंड हेड ऑफ डिपार्मेंट आफ ऑर्थोपेडिक गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज गाजीपुर।
  • स्टार डेंटल एंड फैसियल ट्रामा सेंटर जौनपुर डॉ अजीत कुमार।
  • आर एस हॉस्पिटल दुल्लहपुर गाजीपुर, डॉ राजेश कुमार पांडे के साथ पत्नी डॉ साधना तिवारी
  • सपोर्टेड बाई : मीडिया थीम रिसर्च सेंटर वाराणसी
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