दंपती को मिला सम्मान।
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महिलाओं को आगे रखने में भी स्वार्थ ही रख लो
उन्होंने परिवार में महिलाओं की भूमिका पर भी बात की। कहा कि राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर और सीताराम जैसे संबोधनों में महिलाओं को आगे रखा गया है। बहू, पत्नी और बेटी को लक्ष्मी कहा जाता है। आज के अर्थ में लक्ष्मी का अर्थ रुपया है। मेरी बात मानिए, आप अपने घर की लक्ष्मी को खुश रखिए, लक्ष्मी घर में खुद आ जाएगी। मजाकिया लहजे में कहा कि मैं तो कहती हूं कि इसी स्वार्थ में महिलाओं का सम्मान कर लो, उन्हें आगे रख लोगे तो घर में लक्ष्मी आ जाएगी।
मेहनत करते समय बहरे हो जाइए
जया किशोरी ने लक्ष्य पर फोकस कैसे करें, इस तरह के कई सवालों पर एक कहानी सुनाई। कहा कि एक बंदर पहाड़ी चढ़ रहा था तो नीचे से कई बंदर चिल्ला रहे थे कि मत चढ़, गिर जाएगा। उतर आओ। वह बंदर बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था, लेकिन चढ़ता जा रहा था। अंत में वह सफलतापूर्वक चढ़ गया तो जो मना कर रहे थे, उन्होंने ही तालियां बजाईं। बाद में लोगों को पता चला कि वह बंदर तो बहरा था, नीचे से जो लोग उसे मना कर रहे थे, वह सुन ही नहीं पा रहा था। इसीलिए मेहनत करते समय बस चढ़ते जाइए और लोग क्या कह रहे हैं, उस पर ध्यान मत दीजिए, बहरे हो जाइए।
इन्होंने किया स्वागत : सिल्क मार्क वाराणसी की ओर से जया किशोरी का स्वागत डॉ. देवाशीष चट्टोपध्याय ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर किया।